Previous Year Question
वैदिक कालीन प्रशासन में ‘भागदुह’ कौन अधिकारी था?
राजस्व कर जमा करने वाला
समाचार पहुँचाने वाला दूत
जंगलों का प्रधान अधिकारी
जुआ विभाग का प्रधान अधिकारी
Correct Answer: A
Detailed Solution
उत्तर वैदिक काल में राजा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों को रत्निन् कहा जाता था। ये राजसूय जैसे राजकीय अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे और इनमें से कई राजकीय प्रशासन से संबंधित कार्य भी करते थे।
भागदुह अथवा भागदुघ इन्हीं रत्निनों में से एक था। इसका संबंध राजा के लिए प्राप्त होने वाले भाग से था। ‘भाग’ से आशय सामान्यतः कृषि-उपज में राजा के हिस्से से था। इसलिए भागदुह को राजा का हिस्सा एकत्र करने वाला अथवा उसका वितरण करने वाला अधिकारी माना गया है।
IGNCA की वैदिक प्रशासन संबंधी सामग्री में भागदुह को स्पष्ट रूप से collector of taxes कहा गया है। अन्य विद्वत् सामग्री इसे collector of a share or one who apportioned the share अर्थात राजा के हिस्से को एकत्र करने अथवा बाँटने वाला व्यक्ति बताती है।
यहाँ एक ऐतिहासिक सावधानी भी आवश्यक है। उत्तर वैदिक काल में प्रशासन अभी बाद के विकसित राज्यों की तरह पूर्णतः संगठित नौकरशाही नहीं बना था। इसलिए भागदुह को आधुनिक अर्थ में नियमित Revenue Department का अधिकारी समझने के बजाय राजकीय हिस्से अथवा कर-संग्रह से जुड़ा प्रारम्भिक पदाधिकारी समझना अधिक सही है।
अन्य विकल्पों में संदेशवाहक को पालागल कहा गया है, जबकि अक्षवाप पासा अथवा जुआ संबंधी कार्य से जुड़ा था। इसलिए इनमें से कोई भी भागदुह नहीं था।