JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2023

Previous Year Question

‘मिलिन्द पन्हो’ राजा मिलिन्द तथा एक बौद्ध भिक्षु के मध्य संवाद रूप में है। वह भिक्षु थे—

A.

नागार्जुन

B.

कुमारिल भट्ट

C.

नागभट्ट

D.

नागसेन

Correct Answer: D

Detailed Solution

मिलिन्द पन्हो एक प्रसिद्ध पालि बौद्ध ग्रंथ है, जिसका अर्थ है ‘मिलिन्द के प्रश्न’। यह मुख्यतः राजा मिलिन्द और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच प्रश्नोत्तर और दार्शनिक संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

राजा मिलिन्द की पहचान प्रसिद्ध हिन्द-यूनानी शासक मेनाण्डर से की जाती है। उसकी राजधानी सागल थी, जिसकी पहचान सामान्यतः वर्तमान सियालकोट से की जाती है। मेनाण्डर उत्तर-पश्चिमी भारत के महत्वपूर्ण हिन्द-यूनानी शासकों में था।

ग्रंथ में मिलिन्द बौद्ध धर्म के जटिल दार्शनिक प्रश्न नागसेन के सामने रखता है। इन प्रश्नों में आत्मा अथवा अनात्म, कर्म, पुनर्जन्म, निर्वाण, व्यक्तित्व और नैतिक उत्तरदायित्व जैसे विषय शामिल हैं। नागसेन इनका उत्तर तर्क, उदाहरण और उपमाओं के माध्यम से देते हैं।

इस ग्रंथ का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण रथ की उपमा है। नागसेन समझाते हैं कि जिस प्रकार पहिए, धुरा, आसन और अन्य भागों के समूह को सुविधा के लिए ‘रथ’ कहा जाता है, उसी प्रकार शरीर और मानसिक तत्वों के समूह के लिए व्यक्ति का नाम प्रयुक्त होता है; कोई स्थायी और स्वतंत्र आत्मा आवश्यक नहीं है। यह बौद्ध अनात्म सिद्धांत को समझाने का प्रसिद्ध उदाहरण है।

मिलिन्द पन्हो में मिलिन्द और नागसेन के संवाद बौद्ध दर्शन को प्रश्नोत्तर शैली में प्रस्तुत करते हैं। इसी कारण यह ग्रंथ बौद्ध दार्शनिक साहित्य का महत्वपूर्ण स्रोत है।

नागार्जुन बाद के महायान बौद्ध दर्शन और माध्यमिक परंपरा से जुड़े थे; कुमारिल भट्ट मीमांसा दर्शन के विद्वान थे; और नागभट्ट नाम भारतीय इतिहास में विभिन्न राजवंशीय शासकों से जुड़ा मिलता है। इनमें से मिलिन्द पन्हो का संवाद नागसेन से है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.