JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2022

Previous Year Question

चन्द्रगुप्त-II के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. शक विजय के सन्दर्भ में सबसे सबल प्रमाण इस नरेश की रजत मुद्राएँ हैं।

  2. इन मुद्राओं की तौल लगभग 33 ग्रेन हुआ करती थी।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A.

केवल 1

B.

1 तथा 2 दोनों

C.

केवल 2

D.

न तो 1 न ही 2

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 सही है। चन्द्रगुप्त द्वितीय की रजत मुद्राएँ उसकी शक अथवा पश्चिमी क्षत्रपों पर विजय का अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्राशास्त्रीय प्रमाण हैं। गुप्त शासकों में चन्द्रगुप्त द्वितीय पहला शासक था जिसने बड़े पैमाने पर रजत मुद्राएँ जारी कीं।

इन रजत मुद्राओं का स्वरूप पश्चिमी क्षत्रपों की पूर्ववर्ती मुद्राओं से बहुत मिलता-जुलता था। पश्चिमी क्षत्रप गुजरात, काठियावाड़ और पश्चिमी मालवा के क्षेत्रों में शासन करते थे। चन्द्रगुप्त द्वितीय द्वारा उन्हें पराजित करने के बाद उसी क्षेत्र में प्रचलित मुद्रा-पद्धति को अपनाना उसकी राजनीतिक सत्ता के परिवर्तन का मजबूत प्रमाण है।

इन मुद्राओं पर एक ओर चन्द्रगुप्त द्वितीय का मुखचित्र मिलता है, जबकि दूसरी ओर सामान्यतः गरुड़ का चिह्न और ब्राह्मी लिपि में गुप्त शासक से संबंधित लेख मिलता है। पश्चिमी क्षत्रपों के सिक्कों की नकल करते हुए गुप्त प्रतीकों को जोड़ना विजित पश्चिमी प्रदेशों में नई सत्ता की स्थापना को दर्शाता है।

कथन 2 भी सही है। चन्द्रगुप्त द्वितीय की पश्चिमी शैली की रजत मुद्राओं का मानक भार लगभग 33 ग्रेन, अर्थात लगभग 2.1 ग्राम के आसपास माना जाता है। यह भार पश्चिमी क्षत्रपों की रजत मुद्रा-पद्धति के निकट था।

व्यावहारिक रूप से सभी उपलब्ध सिक्के बिल्कुल एक ही भार के नहीं हैं। उदाहरण के लिए British Museum में संरक्षित चन्द्रगुप्त द्वितीय की कुछ रजत मुद्राओं का भार लगभग 1.87 ग्राम और 1.99 ग्राम है। इससे पता चलता है कि 33 ग्रेन को एक मानक अथवा लगभग भार के रूप में समझना चाहिए, न कि प्रत्येक सिक्के का अनिवार्य रूप से बिल्कुल समान भार।

IGNCA की मुद्रा संबंधी सामग्री भी बताती है कि गुप्तों में रजत मुद्रा-निर्माण चन्द्रगुप्त द्वितीय ने पश्चिमी शक क्षत्रपों को पराजित करने के बाद प्रारम्भ किया और उसकी रजत मुद्राएँ उन्हीं क्षत्रपों की मुद्रा-प्रणाली के भार और स्वरूप पर आधारित थीं।

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