JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2021

Previous Year Question

सातवाहन शासकों के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

  1. सातवाहन नरेश प्राकृत भाषा के पोषक थे।

  2. सातवाहन काल में कला के लोक पक्ष को अधिक प्रोत्साहन मिला।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A.

केवल 1

B.

1 तथा 2 दोनों

C.

केवल 2

D.

न तो 1 न ही 2

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 सही है। सातवाहन शासकों ने प्राकृत भाषा को महत्वपूर्ण संरक्षण दिया। सातवाहन काल के अधिकांश राजकीय अभिलेख प्राकृत भाषा में और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं। नानाघाट, नासिक तथा अन्य स्थलों के अभिलेख इस भाषायी परंपरा के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

सातवाहन शासक हाल का नाम प्राकृत साहित्य के इतिहास में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। परंपरा के अनुसार उसने गाथासप्तशती का संकलन किया, जिसमें मुख्यतः महाराष्ट्री प्राकृत की लगभग सात सौ गाथाएँ हैं। इस रचना में ग्रामीण जीवन, प्रेम, सामाजिक संबंधों और तत्कालीन समाज के अनेक पक्षों का चित्रण मिलता है।

IGNCA में उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री भी स्पष्ट करती है कि सातवाहन शासक प्राकृत को अपनी राजदरबारी भाषा के रूप में संरक्षण देते थे। इससे स्पष्ट है कि प्राकृत केवल सामान्य बोलचाल तक सीमित नहीं थी, बल्कि साहित्य और अभिलेखों में भी उसका व्यापक उपयोग हुआ।

कथन 2 भी सही है। सातवाहन काल में कला का विकास केवल राजकीय संरक्षण से नहीं हुआ; इसमें व्यापारियों, शिल्पियों, श्रेणियों, भिक्षुओं, भिक्षुणियों और सामान्य उपासकों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी थी। यही कारण है कि इस काल की कला में एक मजबूत लोक अथवा सार्वजनिक पक्ष दिखाई देता है।

अमरावती, सांची और दक्कन की बौद्ध गुफाओं तथा स्तूपों में अनेक दान-अभिलेख मिले हैं। पश्चिमी दक्कन के कार्ले, भाजा, नासिक और कन्हेरी जैसे बौद्ध केन्द्रों के विकास में व्यापारिक समुदायों और दानदाताओं की बड़ी भूमिका थी। पूर्वी दक्कन में अमरावती जैसे स्तूपों को भी व्यापक सामुदायिक संरक्षण मिला।

इस प्रकार सातवाहन काल में एक ओर प्राकृत भाषा और साहित्य को संरक्षण मिला, तो दूसरी ओर कला में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी के कारण उसका लोक-पक्ष अधिक विकसित हुआ।

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