Previous Year Question
निम्नलिखित में से किस भारतीय पुरातत्त्ववेत्ता ने सबसे पहले ‘भीमबेटका गुफाओं’ का दौरा किया और उनके शैलचित्रों के प्रागैतिहासिक महत्व को खोजा?
माधो स्वरूप वत्स
एच. डी. सांकलिया
वी. एस. वाकणकर
वी. एन. मिश्र
Correct Answer: C
Detailed Solution
सही उत्तर वी. एस. वाकणकर है।
प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्त्ववेत्ता विष्णु श्रीधर वाकणकर ने 1957 में भीमबेटका के शैलाश्रयों और उनके शैलचित्रों के प्रागैतिहासिक महत्व की पहचान की। उन्हें भारत में शैलकला अध्ययन के अग्रणी विद्वानों में माना जाता है।
भीमबेटका वर्तमान रायसेन जिला, मध्य प्रदेश में विंध्य पर्वतमाला की तलहटी में स्थित शैलाश्रयों का विशाल समूह है। यहाँ प्राकृतिक बलुआ-पत्थर की चट्टानों में बड़ी संख्या में शैलाश्रय हैं और उनमें विभिन्न कालों के चित्र सुरक्षित हैं।
वाकणकर ने 1957 में भोपाल से नागपुर की रेल यात्रा के दौरान इस क्षेत्र की चट्टानों को देखकर उनकी समानता उन शैल संरचनाओं से पहचानी जिन्हें वे पहले अन्य स्थानों पर देख चुके थे। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र का सर्वेक्षण किया और यहाँ बड़ी संख्या में चित्रित शैलाश्रयों की पहचान की।
भीमबेटका के चित्रों में शिकार, पशु, नृत्य, समूह गतिविधियों और मानव जीवन से संबंधित दृश्य मिलते हैं। यहाँ के चित्र एक ही समय के नहीं हैं; UNESCO के अनुसार इनकी परंपरा मध्यपाषाण काल से ऐतिहासिक काल तक विस्तृत दिखाई देती है।
बाद में भीमबेटका में व्यवस्थित पुरातात्त्विक खुदाइयाँ और अध्ययन हुए। वी. एन. मिश्र भी बाद की खुदाइयों और वैज्ञानिक अध्ययनों से जुड़े महत्वपूर्ण पुरातत्त्ववेत्ता थे, लेकिन स्थल के शैलचित्रों के प्रागैतिहासिक महत्व की प्रारम्भिक पहचान का श्रेय वाकणकर को दिया जाता है।
भीमबेटका को उसके शैलचित्रों, दीर्घ मानव-अधिवास और सांस्कृतिक महत्व के कारण 2003 में UNESCO World Heritage List में शामिल किया गया।