Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (समुद्रगुप्त के समकालीन दक्षिण भारत के राजा) | सूची-II (उनके राज्य) |
A. धनंजय | 1. अवमुक्त |
B. नीलराज | 2. कांची |
C. उग्रसेन | 3. कुस्थलपुर |
D. विष्णुगोप | 4. पालक |
कूट:
A-1, B-2, C-3, D-4
A-2, B-1, C-4, D-3
A-3, B-1, C-4, D-2
A-4, B-3, C-2, D-1
Correct Answer: C
Detailed Solution
इस प्रश्न का प्रमुख आधार समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति अर्थात इलाहाबाद स्तम्भ अभिलेख है। इसे उसके दरबारी कवि और अधिकारी हरिषेण ने रचा था। इसमें समुद्रगुप्त के दक्षिणापथ अभियान के दौरान पराजित किए गए बारह दक्षिणी शासकों और उनके राज्यों का उल्लेख मिलता है।
A. धनंजय — कुस्थलपुर (3): प्रयाग प्रशस्ति में कौस्थलपुरक धनंजय का उल्लेख दक्षिणापथ के शासकों में किया गया है। इसलिए धनंजय का राज्य कुस्थलपुर या कौस्थलपुर था।
B. नीलराज — अवमुक्त (1): अभिलेख में अवमुक्तक नीलराज का उल्लेख मिलता है। अतः नीलराज अवमुक्त का शासक था। अवमुक्त की सटीक आधुनिक पहचान पर विद्वानों में पूर्ण सहमति नहीं है, लेकिन अभिलेखीय सुमेलन स्पष्ट है।
C. उग्रसेन — पालक (4): प्रयाग प्रशस्ति में उग्रसेन को पालक्क का शासक बताया गया है। प्रश्न में इसे Palaka लिखा गया है। इसकी पहचान सामान्यतः दक्षिण-पूर्वी दक्कन के क्षेत्र से की जाती है।
D. विष्णुगोप — कांची (2): विष्णुगोप कांची का पल्लव शासक था। दक्षिणी अभियान में वह समुद्रगुप्त के सामने आने वाले महत्वपूर्ण शासकों में था। कांची वर्तमान तमिलनाडु के कांचीपुरम से संबंधित है।
प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने इन दक्षिणी शासकों को पराजित किया, लेकिन उनके राज्यों को सीधे गुप्त साम्राज्य में मिलाने के बजाय उन्हें पुनः शासन करने दिया। इस नीति को सामान्यतः ग्रहण–मोक्ष–अनुग्रह की नीति के रूप में समझाया जाता है।