JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2018

Previous Year Question

निम्नलिखित मंदिरों को कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

I. बृहदीश्वर मंदिर
II. गंगैकोंडचोलपुरम मंदिर
III. महाबलीपुरम का शोर मंदिर
IV. सप्त पैगोडा

कूट:

A.

I, II, IV, III

B.

II, I, III, IV

C.

III, II, I, IV

D.

IV, III, I, II

Correct Answer: D

Detailed Solution

IV. सप्त पैगोडा — 7वीं शताब्दी: इस प्रश्न के संदर्भ में सप्त पैगोडा महाबलीपुरम की प्रारम्भिक पल्लव शैल-कट और एकाश्म मंदिर परंपरा से संबंधित है। विशेष रूप से नरसिंहवर्मन प्रथम, जिसे मामल्ल भी कहा जाता था, के शासनकाल में 7वीं शताब्दी में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथों और अन्य शैल-कट स्मारकों का विकास हुआ। पुरातात्त्विक साहित्य में इन एकाश्म मंदिरों को परंपरागत रूप से Seven Pagodas से भी जोड़ा गया है।

III. शोर मंदिर — 7वीं शताब्दी के अंत/8वीं शताब्दी के प्रारम्भ: महाबलीपुरम का शोर मंदिर प्रारम्भिक शैल-कट और एकाश्म स्थापत्य से बाद का है। इसे पल्लव शासक नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह के काल से जोड़ा जाता है। उसके शासन में शैल-कट निर्माण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर संरचनात्मक मंदिर स्थापत्य विकसित हुआ। इसलिए शोर मंदिर सप्त पैगोडा से संबंधित प्रारम्भिक रथ-परंपरा के बाद आता है।

I. बृहदीश्वर मंदिर — लगभग 1003–1010 ई.: तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर महान चोल शासक राजराज प्रथम ने बनवाया। निर्माण लगभग 1003–04 ई. में प्रारम्भ हुआ और मंदिर का अभिषेक लगभग 1009–1010 ई. में हुआ। यह चोल स्थापत्य की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।

II. गंगैकोंडचोलपुरम मंदिर — 1035 ई.: इसके बाद राजराज प्रथम के पुत्र राजेन्द्र प्रथम ने गंगैकोंडचोलपुरम में विशाल शिव मंदिर बनवाया। UNESCO के अनुसार गंगैकोंडचोलीश्वरम मंदिर 1035 ई. में पूर्ण हुआ। इसलिए यह तंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर से बाद का है।

इस प्रकार स्थापत्य विकास का क्रम भी स्पष्ट दिखाई देता है—पहले पल्लवों की शैल-कट और एकाश्म परंपरा, फिर पल्लवों का संरचनात्मक शोर मंदिर, और उसके कई शताब्दियों बाद चोल काल के विशाल बृहदीश्वर तथा गंगैकोंडचोलपुरम मंदिर।

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