Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I | सूची-II |
A. गांधार कला | 1. मेनाण्डर |
B. जूनागढ़ शिलालेख | 2. पतिक |
C. मिलिन्दपन्हो | 3. कुषाण |
D. तक्षशिला अभिलेख | 4. रुद्रदामन प्रथम |
कूट:
A-1, B-3, C-4, D-2
A-2, B-4, C-3, D-1
A-3, B-4, C-1, D-2
A-2, B-1, C-3, D-4
Correct Answer: C
Detailed Solution
A. गांधार कला — कुषाण (3): गांधार कला का प्रमुख विकास कुषाण काल में हुआ। उत्तर-पश्चिम भारत और गांधार क्षेत्र में भारतीय तथा यूनानी-रोमन कलात्मक तत्वों के सम्मिश्रण से इस शैली का विकास हुआ। कुषाण शासक कनिष्क बौद्ध धर्म का प्रमुख संरक्षक था और उसके शासनकाल में गांधार की बौद्ध मूर्तिकला को विशेष प्रोत्साहन मिला।
B. जूनागढ़ शिलालेख — रुद्रदामन प्रथम (4): प्रसिद्ध जूनागढ़ शिलालेख पश्चिमी क्षत्रप शासक रुद्रदामन प्रथम से संबंधित है। यह शक संवत् 72 अर्थात लगभग 150 ई. का अभिलेख है। इसमें सुदर्शन झील के बाँध के टूटने और रुद्रदामन द्वारा उसकी मरम्मत कराए जाने का विस्तृत विवरण मिलता है। यह प्राचीन भारत के आरंभिक महत्वपूर्ण संस्कृत अभिलेखों में भी गिना जाता है।
C. मिलिन्दपन्हो — मेनाण्डर (1): मिलिन्दपन्हो अर्थात मिलिन्द के प्रश्न बौद्ध ग्रंथ है जिसमें राजा मिलिन्द और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच दार्शनिक संवाद प्रस्तुत किया गया है। मिलिन्द की पहचान हिन्द-यूनानी शासक मेनाण्डर से की जाती है। ग्रंथ में आत्मा, कर्म, पुनर्जन्म और निर्वाण जैसे बौद्ध दार्शनिक विषयों पर प्रश्नोत्तर मिलते हैं।
D. तक्षशिला अभिलेख — पतिक (2): तक्षशिला ताम्रपत्र अभिलेख में पतिक का नाम मिलता है। पतिक, क्षत्रप लियाक कुसुलक का पुत्र था। अभिलेख बुद्ध के अवशेषों की प्रतिष्ठा और बौद्ध विहार से संबंधित दान का उल्लेख करता है। इस कारण तक्षशिला अभिलेख का सुमेलन पतिक से किया जाता है।