JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2017

Previous Year Question

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

सूची-I (तीर्थंकर)

सूची-II (लांछन)

A. आदिनाथ

1. बैल

B. मल्लिनाथ

2. घोड़ा

C. पार्श्वनाथ

3. सर्प

D. सम्भवनाथ

4. जल-कलश

कूट:

A.

A-1, B-4, C-3, D-2

B.

A-1, B-3, C-2, D-4

C.

A-2, B-4, C-3, D-1

D.

A-3, B-1, C-4, D-2

Correct Answer: A

Detailed Solution

जैन मूर्तिकला में प्रत्येक तीर्थंकर की पहचान के लिए एक विशिष्ट लांछन या चिह्न निर्धारित है। विशेष रूप से मध्यकालीन जैन प्रतिमाओं में यह लांछन सामान्यतः प्रतिमा की पीठिका पर अंकित किया जाता था, जिससे समान ध्यान-मुद्रा में निर्मित विभिन्न तीर्थंकरों की पहचान की जा सके।

A. आदिनाथ — बैल (1): आदिनाथ को ऋषभनाथ भी कहा जाता है और वे जैन परंपरा के प्रथम तीर्थंकर हैं। उनका प्रमुख लांछन बैल है। पुरातात्त्विक विवरणों में ऋषभनाथ की प्रतिमाओं की पहचान उनके नीचे बने बैल से की गई है।

B. मल्लिनाथ — जल-कलश (4): मल्लिनाथ जैन परंपरा के 19वें तीर्थंकर हैं। उनका लांछन जल-कलश अथवा घट है। जैन प्रतिमा-विज्ञान की सूचियों में मल्लिनाथ का पहचान-चिह्न स्पष्ट रूप से जल-कलश दिया गया है।

C. पार्श्वनाथ — सर्प (3): पार्श्वनाथ 23वें तीर्थंकर हैं। उनका लांछन सर्प है। उनकी प्रतिमाओं की एक अत्यंत विशिष्ट विशेषता सिर के ऊपर फैले हुए नागफण हैं, जिसके कारण उनकी पहचान अनेक प्रारम्भिक प्रतिमाओं में भी सरलता से की जा सकती है।

D. सम्भवनाथ — घोड़ा (2): सम्भवनाथ जैन परंपरा के तीसरे तीर्थंकर हैं और उनका लांछन घोड़ा है। पुरातात्त्विक अभिलेखों और जैन प्रतिमा-विज्ञान संबंधी विवरणों में सम्भवनाथ की प्रतिमाओं के साथ घोड़े का चिह्न मिलता है।

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