Previous Year Question
प्रारम्भिक ऋग्वैदिक काल में किसे सबसे मूल्यवान सम्पत्ति माना जाता था?
भूमि
गाय
स्त्रियाँ
जल
Correct Answer: B
Detailed Solution
प्रारम्भिक ऋग्वैदिक समाज की अर्थव्यवस्था मुख्यतः पशुपालन प्रधान थी। इसलिए पशुधन, विशेषकर गाय, धन और समृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण माप था। किसी व्यक्ति या जन की सम्पन्नता का अनुमान उसके पास उपलब्ध गायों की संख्या से लगाया जाता था।
ऋग्वेद में गायों और पशुधन की प्राप्ति के लिए अनेक प्रार्थनाएँ मिलती हैं। गाय केवल दूध और दुग्ध उत्पादों का स्रोत ही नहीं थी, बल्कि वह विनिमय, दान, दक्षिणा और आर्थिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई थी। IGNCA की वैदिक सामाजिक-आर्थिक सामग्री में गाय और बैल को ऋग्वैदिक आर्यों की सबसे मूल्यवान सम्पत्ति तथा धन का प्रमुख रूप बताया गया है।
ऋग्वैदिक समाज में गाय के आर्थिक महत्व को भाषा से भी समझा जा सकता है। युद्ध अथवा संघर्ष के लिए प्रयुक्त ‘गविष्टि’ शब्द का मूल अर्थ “गायों की खोज” था। इससे संकेत मिलता है कि पशुधन की प्राप्ति के लिए विभिन्न जनों के बीच संघर्ष भी होते थे।
गाय आर्थिक मूल्य की इकाई के रूप में भी महत्वपूर्ण थी। वस्तुओं के विनिमय में पशुधन का उपयोग होता था और गाय को मूल्य निर्धारित करने के साधन के रूप में भी देखा जाने लगा था। यज्ञों में पुरोहितों को दक्षिणा के रूप में गायें दिए जाने के उल्लेख भी मिलते हैं।
प्रारम्भिक ऋग्वैदिक काल में भूमि व्यक्तिगत सम्पत्ति का प्रमुख आधार नहीं बनी थी, क्योंकि समाज अभी मुख्यतः पशुपालक था और कृषि का महत्व बाद के वैदिक काल में अधिक बढ़ा। इसलिए दिए गए विकल्पों में सबसे मूल्यवान सम्पत्ति गाय थी।