Previous Year Question
सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (सम्राट) | सूची-II (बिरुद) |
A. अशोक | 1. पराक्रमांक |
B. समुद्रगुप्त | 2. प्रियदर्शिन |
C. चन्द्रगुप्त-II | 3. क्रमादित्य |
D. स्कन्दगुप्त | 4. विक्रमादित्य |
कूट:
A-1, B-2, C-3, D-4
A-3, B-2, C-1, D-4
A-2, B-1, C-4, D-3
A-4, B-3, C-2, D-1
Correct Answer: C
Detailed Solution
A. अशोक — प्रियदर्शिन (2): अशोक अपने अधिकांश अभिलेखों में अपने व्यक्तिगत नाम अशोक का प्रयोग नहीं करता। उसके अभिलेखों में सामान्यतः देवानांप्रिय प्रियदर्शिन राजा अथवा प्राकृत रूप में देवानंपिय पियदस्सी राजा मिलता है। ‘प्रियदर्शिन’ का आशय सौम्य अथवा कृपापूर्ण दृष्टि वाला माना जाता है। मास्की जैसे कुछ अभिलेख विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि इनमें अशोक नाम मिलने से ‘देवानांप्रिय प्रियदर्शिन’ की पहचान सम्राट अशोक से सुनिश्चित हुई।
B. समुद्रगुप्त — पराक्रमांक (1): समुद्रगुप्त के साथ पराक्रमांक बिरुद जुड़ा हुआ है। ‘पराक्रम’ वीरता और सैन्य शक्ति को व्यक्त करता है। प्रयाग प्रशस्ति और समुद्रगुप्त की मुद्राएँ उसकी व्यापक सैन्य सफलताओं तथा युद्ध-कौशल की जानकारी देती हैं। गुप्तकालीन अभिलेखीय और मुद्राशास्त्रीय सामग्री में समुद्रगुप्त के लिए पराक्रमांक का प्रयोग मिलता है।
C. चन्द्रगुप्त द्वितीय — विक्रमादित्य (4): चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य बिरुद धारण किया। उसकी कुछ रजत मुद्राओं पर चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। उसने पश्चिमी क्षत्रपों को पराजित कर गुजरात और पश्चिमी भारत के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को गुप्त साम्राज्य में सम्मिलित किया। उसके साथ विक्रम, विक्रमांक और विक्रमादित्य जैसे बिरुद भी जुड़े मिलते हैं।
D. स्कन्दगुप्त — क्रमादित्य (3): स्कन्दगुप्त का आदित्य-बिरुद क्रमादित्य था। मुद्राशास्त्रीय साक्ष्य इस नाम को स्कन्दगुप्त से जोड़ते हैं। स्कन्दगुप्त कुमारगुप्त प्रथम का उत्तराधिकारी था और उसके शासनकाल में गुप्त साम्राज्य को गंभीर बाहरी तथा आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।