JAGTIV · Previous Year Questions

UPPSC

HISTORY · 2015

Previous Year Question

सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर और वंशानुचरित संकेतक हैं—

A.

वेदों के

B.

पुराणों के

C.

उपनिषदों के

D.

सूत्रों के

Correct Answer: B

Detailed Solution

परंपरागत रूप से सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर और वंशानुचरित को पुराणों के पाँच प्रमुख लक्षण माना जाता है। इसी कारण पुराणों को पञ्चलक्षण से युक्त साहित्य भी कहा गया है।

सर्ग का अर्थ मूल सृष्टि है। इसमें ब्रह्मांड, तत्त्वों, जीवों और जगत की उत्पत्ति का वर्णन किया जाता है।

प्रतिसर्ग का संबंध सृष्टि के विनाश के बाद उसके पुनः निर्माण अथवा पुनः सृष्टि से है। इस प्रकार सर्ग मूल सृष्टि और प्रतिसर्ग पुनः सृष्टि को व्यक्त करता है।

वंश में देवताओं, ऋषियों तथा विभिन्न राजवंशों की वंश-परंपराओं का वर्णन मिलता है। विशेष रूप से सूर्यवंश और चन्द्रवंश जैसी वंशावलियाँ पुराणों का महत्वपूर्ण भाग हैं।

मन्वन्तर से आशय विभिन्न मनुओं के शासन-काल अथवा उनसे संबंधित कालखंडों से है। पुराणिक परंपरा में एक कल्प को विभिन्न मन्वन्तरों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक मन्वन्तर से एक मनु जुड़ा होता है।

वंशानुचरित में विभिन्न राजवंशों और उनमें उत्पन्न प्रमुख राजाओं के चरित्र तथा घटनाओं का वर्णन किया जाता है। इस प्रकार वंश जहाँ genealogy देता है, वहीं वंशानुचरित उन वंशों के प्रमुख व्यक्तियों और उनके कार्यों का विवरण प्रस्तुत करता है।

इन पाँचों को संक्षेप में इस सूत्र से व्यक्त किया जाता है—“सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च, वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्चलक्षणम्।”

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