Previous Year Question
मौर्यकाल में ‘सीता’ से तात्पर्य है—
एक देवी
एक धार्मिक संप्रदाय
राजकीय भूमि से प्राप्त आय
ऊसर भूमि
Correct Answer: C
Detailed Solution
मौर्यकालीन आर्थिक और राजस्व व्यवस्था में सीता का संबंध सीधे राज्य के नियंत्रण वाली कृषि भूमि से था। ऐसी राजकीय भूमि से प्राप्त होने वाली आय को सीता कहा जाता था।
राजकीय कृषि भूमि की देखरेख के लिए एक अलग कृषि विभाग था, जिसका प्रमुख अधिकारी सीताध्यक्ष कहलाता था। उसका कार्य राजकीय कृषि भूमि की व्यवस्था करना, उपयुक्त बीजों की प्राप्ति और संरक्षण करना तथा कृषि कार्यों की निगरानी करना था।
मौर्यकाल में कृषि भूमि की राजस्व व्यवस्था को समझते समय सीता और भाग में अंतर महत्वपूर्ण है। सीता राजकीय भूमि से होने वाली आय से संबंधित थी, जबकि भाग सामान्य कृषकों की उपज में राज्य का हिस्सा अर्थात भूमि-राजस्व था।
कौटिल्य के अर्थशास्त्र से स्पष्ट होता है कि मौर्य राज्य स्वयं भी कृषि उत्पादन में प्रत्यक्ष भूमिका निभाता था। राज्य के नियंत्रण वाली उपजाऊ भूमि से प्राप्त आय राजकोष के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक थी।