Previous Year Question
ऋग्वैदिक काल में निष्क किसका आभूषण था?
कान
गला
भुजा
कलाई
Correct Answer: B
Detailed Solution
सही उत्तर गला है।
ऋग्वैदिक काल में निष्क मुख्यतः सोने का ऐसा आभूषण था जिसे गले में पहना जाता था। ऋग्वेद में इसके प्रयोग के प्रमाण मिलते हैं और वैदिक साहित्य में निष्कग्रीव जैसे प्रयोग से भी स्पष्ट होता है कि निष्क का संबंध गले से था।
ऋग्वैदिक समाज में पुरुष और महिलाएँ दोनों आभूषण पहनते थे। विभिन्न अंगों के लिए अलग-अलग आभूषणों का उल्लेख मिलता है। कर्णशोभन कान का आभूषण था, खादि भुजा या पैर में पहना जाने वाला आभूषण हो सकता था, जबकि रुक्म छाती पर पहना जाता था। इसके विपरीत निष्क गले में पहना जाने वाला स्वर्ण आभूषण था।
निष्क का महत्व केवल अलंकरण तक सीमित नहीं रहा। वैदिक साहित्य में निष्क को उपहार और मूल्य की वस्तु के रूप में भी दिए जाने के उल्लेख हैं। धीरे-धीरे इसका प्रयोग मूल्य मापने अथवा विनिमय की वस्तु के रूप में भी होने लगा। इसलिए इसे बाद के सिक्कों की तरह पूर्ण विकसित मुद्रा मानना उचित नहीं होगा, लेकिन यह आभूषण के साथ-साथ आर्थिक मूल्य की वस्तु भी था।