Previous Year Question
भारत ‘अंतर्राष्ट्रीय ताप-नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्टर’ का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है। यदि यह प्रयोग सफल हो जाता है, तो भारत को निम्नलिखित में से कौन-सा तात्कालिक लाभ प्राप्त होगा?
यह विद्युत उत्पादन के लिए यूरेनियम के स्थान पर थोरियम का उपयोग कर सकता है
यह उपग्रह नौसंचालन में एक वैश्विक भूमिका प्राप्त कर सकता है
यह विद्युत उत्पादन में अपने विखंडन रिएक्टरों की दक्षता में तेजी से सुधार ला सकता है
यह विद्युत उत्पादन के लिए संलयन रिएक्टरों का निर्माण कर सकता है
Correct Answer: D
Detailed Solution
विकल्प (d) सही है।
International Thermonuclear Experimental Reactor—ITER का उद्देश्य सूर्य और तारों में होने वाली nuclear fusion प्रक्रिया को पृथ्वी पर नियंत्रित परिस्थितियों में प्रदर्शित करना तथा बड़े पैमाने पर carbon-free fusion energy की वैज्ञानिक और तकनीकी व्यवहार्यता सिद्ध करना है।
ITER में deuterium और tritium जैसे हल्के hydrogen isotopes का fusion कराया जाएगा। इसके लिए plasma को लगभग 150 million °C तापमान तक गर्म करके शक्तिशाली magnetic fields की सहायता से Tokamak के भीतर नियंत्रित किया जाएगा।
ITER को 50 MW की बाहरी heating power से plasma में 500 MW fusion power उत्पन्न करने, अर्थात् Q = 10 प्राप्त करने के लिए design किया गया है। ITER स्वयं इस fusion power को electricity में परिवर्तित नहीं करेगा; यह भविष्य के commercial fusion power plants के निर्माण के लिए आवश्यक technology, materials और operational knowledge विकसित करेगा।
इसकी सफलता से भारत को fusion reactors के निर्माण से संबंधित cryogenics, superconducting magnets, plasma control, remote maintenance, tritium breeding और reactor engineering की क्षमता प्राप्त होगी। इसलिए भारत के लिए संबंधित लाभ विद्युत उत्पादन हेतु fusion reactors बनाने की क्षमता है; इसका thorium के उपयोग, satellite navigation या मौजूदा fission reactors की efficiency से सीधा संबंध नहीं है।
वर्तमान project schedule के अनुसार Start of Research Operation वर्ष 2034, full magnetic energy वर्ष 2036 और deuterium–tritium operation वर्ष 2039 के लिए निर्धारित है। भारत, China, European Union, Japan, South Korea, Russia और United States ITER के सात सदस्य हैं।