JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2015

Previous Year Question

प्रायः समाचारों में आने वाला ‘बेसल III समझौता’ अथवा केवल ‘बेसल III’ किसके लिए है?

A.

जैव विविधता के संरक्षण और धारणीय उपयोग के लिए राष्ट्रीय कार्यनीतियाँ विकसित करना

B.

वित्तीय और आर्थिक दबावों से निपटने की बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता में सुधार करना और जोखिम प्रबंधन में सुधार करना

C.

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना, किंतु विकसित देशों पर अधिक भार डालना

D.

प्रशीतन में क्लोरोफ्लोरोकार्बनों के उपयोग को निरापद रसायनों से प्रतिस्थापित करने के लिए विकसित देशों से निर्धन देशों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करना

Correct Answer: B

Detailed Solution

Basel III बैंकों के regulation, supervision और risk management को मजबूत करने के लिए विकसित अंतरराष्ट्रीय मानकों का एक समूह है। इसे Basel Committee on Banking Supervision—BCBS ने वर्ष 2007–09 के Global Financial Crisis से सामने आई बैंकिंग कमजोरियों के प्रत्युत्तर में विकसित किया।

Basel III का प्रारंभिक framework दिसंबर 2010 में जारी किया गया और जून 2011 में संशोधित किया गया।

इसका उद्देश्य बैंकों को निम्नलिखित जोखिमों से अधिक सुरक्षित बनाना है:

  • अचानक होने वाली loan losses।

  • financial-market stress।

  • liquidity crisis।

  • excessive leverage।

  • deposit withdrawal अथवा wholesale funding रुकने का जोखिम।

  • किसी बड़े बैंक की विफलता से पूरी वित्तीय प्रणाली में संकट फैलना।

Basel III के प्रमुख घटक

1. बेहतर गुणवत्ता वाली पूँजी

बैंकों को losses absorb करने के लिए अधिक और बेहतर गुणवत्ता की पूँजी रखनी होती है। इसमें Common Equity Tier 1—CET1 सर्वाधिक उच्च गुणवत्ता वाली regulatory capital है।

Basel III की अंतरराष्ट्रीय न्यूनतम आवश्यकताएँ हैं:

  • CET1: Risk-Weighted Assets का 4.5%

  • Tier 1 Capital: 6%

  • Total Regulatory Capital: 8%

2. Capital Conservation Buffer

बैंकों को सामान्य समय में CET1 के रूप में अतिरिक्त 2.5% Capital Conservation Buffer—CCB बनाए रखना होता है। इससे न्यूनतम कुल capital और CCB मिलाकर 10.5% हो जाता है।

यदि बैंक का capital buffer निर्धारित स्तर से नीचे आता है, तो dividend, bonus और अन्य distributions पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

3. Countercyclical Capital Buffer

अत्यधिक credit growth से systemic risk बढ़ने पर राष्ट्रीय regulator 0 से 2.5% तक अतिरिक्त buffer लागू कर सकता है।

4. Leverage Ratio

यह बिना risk-weighting के बैंक की Tier 1 capital की तुलना उसके कुल exposure से करता है। इसका उद्देश्य अत्यधिक borrowing और balance-sheet expansion रोकना है। Basel minimum सामान्यतः 3% है।

5. Liquidity Coverage Ratio—LCR

बैंक के पास इतने High-Quality Liquid Assets होने चाहिए कि वह 30 दिनों की गंभीर liquidity stress की स्थिति में अनुमानित net cash outflow पूरा कर सके। पूर्ण LCR requirement 100% है।

6. Net Stable Funding Ratio—NSFR

बैंक को एक वर्ष की अवधि के लिए अपने assets और off-balance-sheet exposures के अनुरूप पर्याप्त stable funding रखनी होती है। NSFR की न्यूनतम आवश्यकता 100% है।

Basel III कोई biodiversity, climate-emission अथवा CFC-replacement agreement नहीं है। वे विषय क्रमशः Convention on Biological Diversity, climate agreements और Montreal Protocol से संबंधित हैं। अतः उत्तर (b) है।

भारत में वर्तमान स्थिति (2026)

भारत में RBI ने Basel III आधारित capital और liquidity standards लागू किए हैं। भारतीय scheduled commercial banks के लिए सामान्य न्यूनतम स्तर Basel के अंतरराष्ट्रीय minima से कुछ अधिक रखे गए हैं:

  • न्यूनतम CET1 ratio: 5.5%

  • न्यूनतम Tier 1 capital ratio: 7%

  • न्यूनतम Capital to Risk-Weighted Assets Ratio—CRAR: 9%

  • Capital Conservation Buffer: 2.5%

  • CRAR तथा CCB मिलाकर सामान्य आवश्यकता: 11.5%

इससे स्पष्ट है कि Basel III का मूल उद्देश्य financial और economic stress सहने की बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता तथा risk management को सुधारना है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.