JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2017

Previous Year Question

‘देशी अंश आवश्यकता (Domestic Content Requirement)’ पद कभी-कभी समाचारों में किसके संदर्भ में देखा जाता है?

A.

हमारे देश में सौर ऊर्जा उत्पादन का विकास करना

B.

हमारे देश में विदेशी TV चैनलों को अनुज्ञापत्र देना

C.

हमारे खाद्य उत्पादों को अन्य देशों को निर्यात करना

D.

विदेशी शिक्षा संस्थानों को हमारे देश में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति देना

Correct Answer: A

Detailed Solution

Domestic Content Requirement—DCR का अर्थ ऐसी शर्त से है, जिसके अंतर्गत किसी परियोजना, उत्पाद अथवा सरकारी सहायता का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित मात्रा या प्रतिशत में घरेलू रूप से निर्मित वस्तुओं अथवा components का प्रयोग करना आवश्यक होता है।

यह पद भारत के Jawaharlal Nehru National Solar Mission—JNNSM के अंतर्गत सौर ऊर्जा परियोजनाओं में भारत में निर्मित solar cells और solar modules के उपयोग की अनिवार्यता के कारण समाचारों में था। इसलिए विकल्प (a) सही है।

भारत–सौर ऊर्जा विवाद की पृष्ठभूमि

JNNSM के प्रारम्भिक चरणों में कुछ solar power developers के लिए यह आवश्यक किया गया था कि वे निर्धारित श्रेणी के solar cells और modules भारत में निर्मित स्रोतों से खरीदें।

इस व्यवस्था का उद्देश्य था:

  • भारत में solar manufacturing capacity विकसित करना।

  • आयातित solar cells और modules पर निर्भरता कम करना।

  • घरेलू उद्योग, रोजगार और Technology Capacity का विकास करना।

  • Renewable Energy supply chain को देश के भीतर मजबूत करना।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने 6 फरवरी 2013 को WTO में भारत के विरुद्ध परामर्श का अनुरोध किया। इस विवाद को India—Certain Measures Relating to Solar Cells and Solar Modules, DS456 कहा गया।

अमेरिका का तर्क था कि imported solar cells और modules के मुकाबले घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देने वाली DCR शर्त:

  • GATT, 1994 के Article III:4 में निर्धारित National Treatment सिद्धांत, और

  • TRIMs Agreement के Article 2.1

के अनुरूप नहीं थी।

WTO Panel और बाद में Appellate Body ने निर्धारित JNNSM उपायों के संबंध में अमेरिका के प्रमुख दावों को स्वीकार किया। भारत का Government Procurement संबंधी बचाव भी सफल नहीं हुआ, क्योंकि सरकार द्वारा खरीदा जाने वाला उत्पाद electricity था, जबकि भेदभाव solar cells और modules के बीच किया जा रहा था।

इस निर्णय का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक प्रकार की Make in India अथवा घरेलू विनिर्माण सहायता स्वतः WTO-विरोधी है। किसी नीति की वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि:

  • वह आयातित और घरेलू products के साथ कैसा व्यवहार करती है;

  • सहायता production से जुड़ी है या inputs की अनिवार्य घरेलू खरीद से;

  • क्या वह वैध government procurement exception के भीतर आती है;

  • संबंधित WTO Agreement में कोई अन्य exception लागू होता है या नहीं।

इसीलिए DCR और Production Linked Incentive—PLI एक ही नीति-साधन नहीं हैं। DCR किसी परियोजना में domestic input के उपयोग को अनिवार्य करता है, जबकि PLI पात्र निर्माताओं को निर्धारित production और performance के आधार पर incentive देता है।

वर्तमान स्थिति (2026)

भारत ने घरेलू solar manufacturing को बढ़ाने के लिए DCR के अतिरिक्त दूसरे नीतिगत साधनों का भी उपयोग किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • High-Efficiency Solar PV Modules के लिए PLI Scheme।

  • Approved List of Models and Manufacturers—ALMM।

  • निर्धारित सरकारी योजनाओं में domestic solar cells और modules से संबंधित शर्तें।

  • Basic Customs Duty तथा manufacturing ecosystem के लिए अन्य सहायता।

Solar PV Modules की PLI Scheme का कुल स्वीकृत परिव्यय ₹24,000 करोड़ है। चयनित निर्माताओं को उत्पादन आरम्भ होने के बाद अधिकतम पाँच वर्षों तक performance-linked incentive दिए जाने का प्रावधान है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.