Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा उन विदेशी निवेशकों को जारी किया जाता है, जो स्वयं को सीधे पंजीकृत कराए बिना भारतीय शेयर बाजार का हिस्सा बनना चाहते हैं?
जमा प्रमाणपत्र
वाणिज्यिक पत्र
वचन पत्र
सहभागी नोट
Correct Answer: D
Detailed Solution
Participatory Note, जिसे सामान्यतः P-Note कहा जाता है, एक प्रकार का Offshore Derivative Instrument (ODI) है। प्रश्न पूछे जाने के समय इसे भारत में पंजीकृत Foreign Institutional Investors द्वारा विदेशी निवेशकों को जारी किया जाता था।
इसकी सामान्य कार्यप्रणाली इस प्रकार है:
पंजीकृत FII भारतीय शेयर या अन्य अनुमत प्रतिभूति खरीदता है।
वह उस भारतीय प्रतिभूति को underlying asset बनाकर विदेशी निवेशक को P-Note जारी करता है।
P-Note का मूल्य और उससे मिलने वाला return underlying भारतीय प्रतिभूति के प्रदर्शन से जुड़ा रहता है।
विदेशी निवेशक को भारतीय बाजार का आर्थिक exposure मिल जाता है, लेकिन वह सीधे भारतीय कंपनी के shareholder register में दर्ज नहीं होता।
इस व्यवस्था में underlying भारतीय प्रतिभूति का registered holder FII होता था। P-Note धारक को उस प्रतिभूति से जुड़ा economic benefit मिलता था, लेकिन सामान्यतः प्रत्यक्ष ownership और voting rights नहीं मिलते थे।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
Certificate of Deposit किसी बैंक अथवा पात्र financial institution द्वारा जारी negotiable money-market instrument है।
Commercial Paper उच्च credit rating वाली कंपनी द्वारा अल्पकालीन धन जुटाने के लिए जारी unsecured money-market instrument है।
Promissory Note एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को निश्चित राशि भुगतान करने का लिखित और बिना शर्त वचन है।
इनमें से कोई भी विदेशी निवेशक को अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय stock market exposure देने के लिए विशेष रूप से निर्मित instrument नहीं है।
P-Notes से संबंधित प्रमुख चिंताएँ beneficial ownership की अस्पष्टता, money laundering, round-tripping और market volatility रही हैं। इसी कारण SEBI ने इनके लिए KYC, reporting तथा permissible investor से संबंधित नियम कठोर किए।
वर्तमान स्थिति (2026)
वर्तमान SEBI terminology में Foreign Institutional Investor के स्थान पर Foreign Portfolio Investor (FPI) और Participatory Note के लिए अधिक व्यापक पद Offshore Derivative Instrument (ODI) प्रयुक्त होता है।
SEBI के दिसंबर 2024 के नियमों के अनुसार:
ODI जारी करने के लिए अलग dedicated FPI registration रखना आवश्यक है, जिसके नाम के साथ “ODI” suffix होता है।
सामान्यतः derivatives को ODI का underlying नहीं बनाया जा सकता।
ODI को उसी underlying security से one-to-one basis पर पूर्णतः hedged रखना होता है।
किसी एक भारतीय corporate group में 50% से अधिक equity-ODI position रखने वाले कुछ ODI subscribers से granular ownership disclosures लिए जाते हैं।
भारतीय बाजार में ₹25,000 करोड़ से अधिक equity position वाले ODI subscriber पर भी निर्धारित अतिरिक्त disclosure framework लागू हो सकता है।
इसलिए P-Notes समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन अब वे अधिक कठोर KYC, disclosure, reporting और hedging requirements के अधीन विनियमित ODIs के रूप में कार्य करते हैं।