Previous Year Question
मार्च 2000 के अंत में भारत का बाह्य ऋण 98,158 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर मार्च 2001 के अंत में 100,255 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। इसका कारण निम्नलिखित में से किसमें वृद्धि थी?
बहुपक्षीय और द्विपक्षीय ऋण
रुपया ऋण
वाणिज्यिक उधार
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से उधार
Correct Answer: C
Detailed Solution
RBI के अनुसार मार्च 2000 से मार्च 2001 के बीच भारत का कुल external debt 2,097 मिलियन डॉलर, अर्थात लगभग 2.1%, बढ़ा।
इस अवधि में प्रमुख घटकों का परिवर्तन इस प्रकार था:
बाह्य ऋण का घटक | मार्च 2000 | मार्च 2001 | परिवर्तन |
बहुपक्षीय ऋण | $31,438 million | $31,103 million | −$335 million |
द्विपक्षीय ऋण | $18,176 million | $16,624 million | −$1,552 million |
IMF ऋण | $26 million | $0 | −$26 million |
वाणिज्यिक उधार | $26,634 million | $29,941 million | +$3,307 million |
NRI Deposits | $13,562 million | $15,432 million | +$1,870 million |
रुपया ऋण | $4,389 million | $3,693 million | −$696 million |
अल्पकालिक ऋण | $3,933 million | $3,462 million | −$471 million |
कुल बाह्य ऋण | $98,158 million | $100,255 million | +$2,097 million |
इससे स्पष्ट है कि:
बहुपक्षीय और द्विपक्षीय ऋण दोनों घटे थे; इसलिए विकल्प (a) गलत है।
रुपया ऋण भी घटा था; इसलिए विकल्प (b) गलत है।
IMF का बकाया मार्च 2001 तक शून्य हो गया था; इसलिए विकल्प (d) गलत है।
commercial borrowings में 3,307 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई; इसलिए विकल्प (c) सही है।
वाणिज्यिक उधार में वृद्धि का प्रमुख कारण नवंबर 2000 में जुटाए गए लगभग 5.5 अरब डॉलर के India Millennium Deposits—IMDs थे। उस समय RBI के external debt classification में IMDs को commercial borrowings के अंतर्गत सम्मिलित किया गया था।
हालाँकि IMDs के कारण gross commercial debt बढ़ा, लेकिन सामान्य commercial borrowings की सुस्ती, valuation effects तथा दूसरे debt components में कमी के कारण कुल external debt केवल 2.1 अरब डॉलर बढ़ा।