JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2022

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यू० एस० फेडरल रिज़र्व की सख्त मौद्रिक नीति पूँजी पलायन की ओर ले जा सकती है।

  2. पूँजी पलायन वर्तमान विदेशी वाणिज्यिक उधार (External Commercial Borrowings—ECBs) वाली फर्मों की ब्याज लागत को बढ़ा सकता है।

  3. घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन ECBs से संबद्ध मुद्रा जोखिम को घटाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A.

केवल 1 और 2

B.

केवल 2 और 3

C.

केवल 1 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन 1 सही है।

जब US Federal Reserve inflation नियंत्रित करने के लिए policy rate बढ़ाता है अथवा liquidity कम करता है, तो अमेरिकी Treasury securities तथा अन्य dollar-denominated assets पर प्रतिफल बढ़ सकता है। इसके कारण निवेशक अपेक्षाकृत जोखिमपूर्ण emerging markets से धन निकालकर अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर ले जा सकते हैं।

इस प्रक्रिया से:

  • भारत जैसे emerging markets से Foreign Portfolio Investment का बहिर्वाह हो सकता है।

  • डॉलर की माँग बढ़ सकती है।

  • घरेलू मुद्रा पर depreciation का दबाव पड़ सकता है।

  • घरेलू bond yields और risk premium बढ़ सकते हैं।

कथन में “could lead” कहा गया है; इसलिए यह आवश्यक परिणाम नहीं, बल्कि एक संभावित transmission channel है।

कथन 2 सही है।

ECBs भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी स्रोतों से लिया गया commercial debt होता है। ये ऋण सामान्यतः डॉलर, यूरो अथवा अन्य विदेशी मुद्रा में होते हैं।

पूँजी पलायन की स्थिति में ECB की लागत दो माध्यमों से बढ़ सकती है:

  • वैश्विक interest rates तथा country risk premium बढ़ने से floating-rate ECB और नए refinancing की लागत बढ़ सकती है।

  • रुपये के depreciation से विदेशी मुद्रा में देय ब्याज की rupee cost बढ़ जाती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी को 10 million डॉलर का भुगतान करना है:

  • ₹75 प्रति डॉलर पर देय राशि = ₹75 करोड़

  • ₹82 प्रति डॉलर पर देय राशि = ₹82 करोड़

अर्थात डॉलर में देनदारी समान रहने पर भी कंपनी पर रुपये में ₹7 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ता है। यदि कंपनी ने hedging नहीं की है, तो प्रभाव अधिक प्रत्यक्ष होगा।

कथन 3 गलत है।

घरेलू मुद्रा का depreciation अथवा अवमूल्यन ECB से जुड़ा currency risk घटाता नहीं, बल्कि सामान्यतः बढ़ाता है। विदेशी मुद्रा में मूलधन और ब्याज चुकाने के लिए पहले से अधिक रुपये की आवश्यकता पड़ती है।

Currency risk को forward contracts, options, swaps अथवा natural hedge से घटाया जा सकता है; केवल currency depreciation से नहीं।

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