Previous Year Question
भारत अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC), जो एक बहुविध परिवहन गलियारा है, के संस्थापक सदस्यों में से एक है। यह निम्नलिखित में से किसे जोड़ेगा?
भारत को ईरान के रास्ते मध्य एशिया से यूरोप
भारत को चीन के रास्ते मध्य एशिया से
भारत को बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया से
भारत को अज़रबैजान के रास्ते यूरोप से
Correct Answer: A
Detailed Solution
International North-South Transport Corridor—INSTC लगभग 7,200 किमी लंबा बहुविध माल-परिवहन गलियारा है। इसमें समुद्री मार्ग, रेलमार्ग और सड़क मार्ग का संयुक्त उपयोग किया जाता है।
INSTC का मूल उद्देश्य भारत को ईरान के माध्यम से कैस्पियन सागर क्षेत्र, मध्य एशिया, रूस और आगे यूरोप से जोड़ना है। इसका सामान्य मार्ग इस प्रकार समझा जा सकता है:
भारत के पश्चिमी बंदरगाह → ईरान → कैस्पियन सागर/मध्य एशिया → रूस → यूरोप
भारत, ईरान और रूस ने 12 सितंबर 2000 को सेंट पीटर्सबर्ग में INSTC की स्थापना से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसलिए ये तीनों इसके संस्थापक सदस्य हैं। यह समझौता वर्ष 2002 में प्रभावी हुआ।
INSTC के तीन प्रमुख मार्ग-विकल्प विकसित हुए हैं:
पश्चिमी मार्ग: ईरान से अज़रबैजान होते हुए रूस;
मध्य मार्ग: ईरान के बंदरगाहों से कैस्पियन सागर पार करके रूस;
पूर्वी मार्ग: ईरान से तुर्कमेनिस्तान और कजाखस्तान होते हुए रूस।
विकल्प (a) सही है, क्योंकि इसमें ईरान के माध्यम से भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने की व्यापक भौगोलिक दिशा दी गई है।
विकल्प (b) गलत है क्योंकि INSTC का मूल मार्ग चीन से होकर नहीं जाता। विकल्प (c) भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और पूर्वी संपर्क परियोजनाओं से संबंधित दिशा है। विकल्प (d) अधूरा है क्योंकि अज़रबैजान केवल INSTC की एक शाखा पर स्थित देश है; गलियारे की व्यापक संरचना ईरान के रास्ते मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक जाती है।
आर्थिक महत्त्व
INSTC से भारत को निम्नलिखित लाभ मिलने की संभावना है:
स्वेज नहर वाले पारंपरिक समुद्री मार्ग की तुलना में कम परिवहन समय;
भारत की मध्य एशिया तक स्थल-संपर्क की कमी का समाधान;
रूस और यूरोप के साथ माल-परिवहन का वैकल्पिक मार्ग;
ईरान के बंदरगाहों और रेल नेटवर्क का उपयोग;
माल ढुलाई लागत और Transit Time में संभावित कमी।
विभिन्न परीक्षण अध्ययनों में पारंपरिक मार्ग की तुलना में माल ढुलाई समय में लगभग 40% और लागत में लगभग 30% तक कमी की संभावना बताई गई है। वास्तविक बचत माल, मार्ग, सीमा-शुल्क प्रक्रिया और उपलब्ध रेल-सड़क संपर्क पर निर्भर करती है।
वर्तमान स्थिति (2026)
INSTC के अनेक खंड कार्यरत हैं, जबकि कुछ रेल और सीमा-संपर्क खंड अभी विकासाधीन हैं। मई 2024 में भारत और ईरान के बीच चाबहार के शाहिद बेहेश्ती बंदरगाह के संचालन के लिए 10 वर्षीय अनुबंध किया गया। चाबहार भारत की ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच को मजबूत करता है तथा व्यापक उत्तर-दक्षिण संपर्क व्यवस्था का पूरक है।