JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2014

Previous Year Question

भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के संदर्भ में, विभिन्न फसलों की ‘बीज प्रतिस्थापन दरों’ को बढ़ाने से भविष्य के खाद्य उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है। किंतु इसके व्यापक/वृहत्तर कार्यान्वयन में क्या बाध्यता/बाध्यताएँ हैं?

  1. कोई राष्ट्रीय बीज नीति नहीं बनी है।

  2. सब्जियों के गुणवत्तापूर्ण बीजों तथा बागवानी फसलों की रोपण-सामग्रियों की आपूर्ति में निजी क्षेत्र की कोई सहभागिता नहीं है।

  3. कम मूल्य और अधिक परिमाण वाली फसलों के मामले में गुणवत्तापूर्ण बीजों की माँग और आपूर्ति के बीच अंतराल है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.

1 और 2

B.

केवल 3

C.

2 और 3

D.

इनमें से कोई नहीं

Correct Answer: B

Detailed Solution

Seed Replacement Rate—SRR से आशय कुल बोए गए क्षेत्र में उस क्षेत्र के प्रतिशत से है जिसमें किसानों द्वारा बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले Farm-saved Seeds के स्थान पर Certified अथवा Quality Seeds का उपयोग किया गया है।

उच्च SRR से बेहतर Germination, Genetic Purity, Disease Resistance और Yield Potential प्राप्त हो सकते हैं। लेकिन प्रत्येक फसल के लिए अत्यधिक SRR आवश्यक नहीं होता; Self-pollinated फसलों के बीज कुछ वर्षों तक पुनः उपयोग किए जा सकते हैं, जबकि Hybrid Seeds में अपेक्षाकृत अधिक Seed Replacement आवश्यक होता है।

कथन 1 गलत है। भारत में राष्ट्रीय बीज नीति, 2002 विद्यमान थी। इसके अतिरिक्त बीज क्षेत्र को Seeds Act, 1966; Seeds Rules, 1968 और Seeds (Control) Order, 1983 जैसे कानूनी एवं नियामकीय प्रावधानों से नियंत्रित किया जाता है। इसलिए राष्ट्रीय बीज नीति न होने का कथन गलत है।

कथन 2 गलत है। सब्जियों, फलों, Hybrid Seeds तथा अन्य उच्च-मूल्य वाली फसलों के बीज और Planting Material की आपूर्ति में निजी क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण भागीदारी रही है। वास्तव में निजी Seed Companies विशेष रूप से Hybrid और High-value Seeds के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

कथन 3 सही है। गेहूँ, धान, दलहन और अन्य Low-value, High-volume Crops के लिए बहुत बड़ी मात्रा में बीज की आवश्यकता होती है। इन फसलों में:

  • बीज का Profit Margin अपेक्षाकृत कम होता है।

  • भारी मात्रा के कारण Production, Processing, Storage और Transportation Cost अधिक होती है।

  • दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर आपूर्ति कठिन होती है।

  • निजी क्षेत्र का Commercial Incentive उच्च-मूल्य Hybrid Seeds की तुलना में कम हो सकता है।

इस कारण गुणवत्तापूर्ण बीजों की माँग और समय पर उपलब्ध आपूर्ति के बीच अंतर बना रह सकता है। इसलिए केवल कथन 3 सही है।

वर्तमान स्थिति (2026)

राष्ट्रीय बीज नीति, 2002 तथा बीजों से संबंधित वैधानिक व्यवस्था अभी भी भारतीय Seed Sector के आधारभूत Framework का हिस्सा हैं। गुणवत्तापूर्ण बीजों का उत्पादन और वितरण Sub-Mission on Seeds and Planting Material—SMSP, Seed Village Programme, Seed Minikits, Certified Seed Production और Seed Testing Infrastructure जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बढ़ाया जाता है।

वर्तमान नीति में निम्नलिखित पर विशेष ध्यान है:

  • Climate-resilient और High-yielding Varieties।

  • Pulses, Oilseeds और Millets के गुणवत्तापूर्ण बीज।

  • स्थानीय Seed Production और Seed Villages।

  • Seed Traceability तथा Quality Control।

  • सार्वजनिक संस्थानों और निजी Seed Companies दोनों की भागीदारी।

इसलिए कथन 1 और 2 वर्तमान संदर्भ में भी सही नहीं हो जाते; हालाँकि विभिन्न फसलों और क्षेत्रों में Quality-seed Availability का अंतर अभी भी नीति का महत्त्वपूर्ण विषय है।

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