Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली मुख्यतः उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित है, जिसमें निवारक, संवर्धनात्मक और पुनर्वासात्मक देखभाल सीमित है।
कथन-II: स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के भारत के विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित करने का प्राथमिक उत्तरदायित्व राज्यों का है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है
कथन-I सही है किंतु कथन-II गलत है
कथन-I गलत है किंतु कथन-II सही है
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन-I सही है। भारत की पारंपरिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का बड़ा हिस्सा रोग होने के बाद उसके Diagnosis और Treatment अर्थात Curative Care पर केंद्रित रहा है। इसके विपरीत रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन और उपचार के बाद पुनर्वास को तुलनात्मक रूप से कम प्राथमिकता एवं संसाधन मिले।
स्वास्थ्य देखभाल के चार प्रमुख आयाम हैं:
Preventive Care: टीकाकरण, Screening, स्वच्छता और रोग-निवारण।
Promotive Care: पोषण, व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहन।
Curative Care: रोग का परीक्षण, दवा, उपचार और शल्य-चिकित्सा।
Rehabilitative Care: बीमारी, दुर्घटना अथवा Disability के बाद कार्यक्षमता की पुनर्स्थापना।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने इसी असंतुलन को सुधारने के लिए Primary Healthcare, Prevention और Health Promotion पर अधिक बल दिया। बाद में Health and Wellness Centres के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने का प्रयास किया गया।
कथन-II भी सही है। संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 6 में Public Health and Sanitation; Hospitals and Dispensaries को रखा गया है। इसलिए अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्यकर्मियों और राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के संगठन का प्राथमिक उत्तरदायित्व राज्यों का है।
केंद्र सरकार राष्ट्रीय नीतियाँ बनाती है, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाती है तथा राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देती है। इस प्रकार भारत की व्यवस्था में केंद्र और राज्य दोनों कार्य करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रत्यक्ष संगठन मुख्यतः राज्यों के पास है।
कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है। राज्यों का स्वास्थ्य सेवाओं के संगठन के लिए उत्तरदायी होना एक प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था है। इससे यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था उपचारात्मक देखभाल पर अधिक और निवारक देखभाल पर कम केंद्रित क्यों रही। इसके पीछे वित्तपोषण, अस्पताल-केंद्रित व्यवस्था, मानव संसाधन, रोग-भार और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता जैसे अलग कारण हैं।