Previous Year Question
‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
यह योजना गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाहियों में महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल सेवाओं के न्यूनतम पैकेज तथा किसी भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में प्रसव के बाद छह महीने तक स्वास्थ्य देखभाल सेवा की गारंटी देती है।
इस योजना के अंतर्गत निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता कुछ विशेषज्ञताओं की सेवाएँ निकटवर्ती सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में स्वेच्छा से प्रदान कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Solution
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल है। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में निश्चित दिवस पर गुणवत्तापूर्ण और व्यापक Antenatal Care उपलब्ध कराना है।
PMSMA के अंतर्गत प्रत्येक महीने की 9 तारीख को निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर गर्भवती महिलाओं की जाँच की जाती है। इसका उद्देश्य प्रत्येक गर्भवती महिला को दूसरी अथवा तीसरी तिमाही में कम-से-कम एक बार चिकित्सक अथवा विशेषज्ञ द्वारा व्यापक प्रसवपूर्व जाँच उपलब्ध कराना है।
कथन 1 गलत है। इसका पहला भाग—दूसरी और तीसरी तिमाही में Antenatal Care उपलब्ध कराना—सही है। लेकिन PMSMA किसी भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में प्रसव के बाद छह महीने तक स्वास्थ्य सेवा की गारंटी नहीं देता। Post-delivery Healthcare का यह दावा PMSMA के निर्धारित लाभों का भाग नहीं है। इस कारण पूरा कथन गलत हो जाता है।
PMSMA के अंतर्गत सामान्यतः निम्नलिखित सेवाएँ दी जाती हैं:
गर्भावस्था संबंधी चिकित्सकीय परीक्षण;
रक्तचाप, वजन और भ्रूण की जाँच;
Haemoglobin, रक्त तथा मूत्र संबंधी आवश्यक परीक्षण;
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान;
आवश्यक दवाएँ और परामर्श;
चिन्हित High-risk Pregnancy की निगरानी और Referral।
कथन 2 सही है। PMSMA में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की स्वैच्छिक भागीदारी का प्रावधान है। Obstetricians, Radiologists और Physicians जैसे विशेषज्ञ निकटवर्ती सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर अपनी सेवाएँ स्वेच्छा से दे सकते हैं। इससे उन क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ती है जहाँ सरकारी व्यवस्था में विशेषज्ञों की कमी हो सकती है।