JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2011

Previous Year Question

भारत में, कृषि और संबद्ध गतिविधियों को ऋण वितरण में निम्नलिखित में से किसका सर्वाधिक अंश है?

A.

वाणिज्यिक बैंक

B.

सहकारी बैंक

C.

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

D.

सूक्ष्म-वित्त संस्थाएँ

Correct Answer: A

Detailed Solution

भारत में कृषि ऋण की संस्थागत व्यवस्था में मुख्यतः Scheduled Commercial Banks, Cooperative Banks और Regional Rural Banks शामिल हैं। इनमें वितरित कृषि ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा वाणिज्यिक बैंकों का रहा है।

प्रश्न के आसपास के समय, वित्त वर्ष 2010-11 में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए संस्थागत ऋण वितरण लगभग इस प्रकार था:

  • वाणिज्यिक बैंक—लगभग ₹3.46 लाख करोड़।

  • सहकारी बैंक—लगभग ₹0.78 लाख करोड़।

  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक—लगभग ₹0.44 लाख करोड़।

  • कुल संस्थागत कृषि ऋण—लगभग ₹4.68 लाख करोड़।

इस प्रकार Commercial Banks का हिस्सा लगभग 74%, Cooperative Banks का लगभग 17% और Regional Rural Banks का लगभग 9–10% था।

वाणिज्यिक बैंकों की हिस्सेदारी अधिक होने के प्रमुख कारण:

  • देशभर में अपेक्षाकृत बड़ा Branch Network।

  • कृषि को Priority Sector Lending में शामिल किया जाना।

  • फसल ऋण के साथ कृषि मशीनरी, सिंचाई, डेयरी और अन्य Allied Activities को ऋण।

  • Kisan Credit Card के माध्यम से अल्पकालीन Working Capital।

  • Public Sector Banks की ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उपस्थिति।

  • कृषि ऋण से संबंधित सरकार एवं RBI के Targets।

विकल्पों का परीक्षण:

(a) वाणिज्यिक बैंक—सही

Public Sector Banks, Private Sector Banks और अन्य Scheduled Commercial Banks कृषि ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा वितरित करते हैं।

(b) सहकारी बैंक—गलत

सहकारी बैंक ग्रामीण अल्पकालीन कृषि ऋण में महत्त्वपूर्ण हैं। इनकी संरचना में State Cooperative Banks, District Central Cooperative Banks और PACS शामिल हैं, लेकिन कुल ऋण वितरण में इनका हिस्सा Commercial Banks से कम था।

(c) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक—गलत

RRBs की स्थापना विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण कारीगरों को बैंकिंग सेवा देने के लिए की गई थी। फिर भी उनके अपेक्षाकृत छोटे आकार के कारण कुल कृषि ऋण में उनका हिस्सा कम था।

(d) सूक्ष्म-वित्त संस्थाएँ—गलत

MFIs और Self-Help Group–Bank Linkage Programme वित्तीय समावेशन में महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन कुल कृषि एवं संबद्ध ऋण वितरण में उनका हिस्सा Commercial Banks से बहुत कम था।

सावधानी: कृषि ऋण का अधिक वितरण और किसानों तक ऋण की समान पहुँच एक ही बात नहीं है। छोटे एवं सीमांत किसानों, पट्टेदार किसानों और मौखिक बटाईदारों को Formal Credit प्राप्त करने में Collateral और भूमि-अभिलेख संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।

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