JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2020

Previous Year Question

भारत में, निम्नलिखित में से किन्हें कृषि में सार्वजनिक निवेश माना जा सकता है?

  1. सभी फसलों की कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करना

  2. प्राथमिक कृषि साख समितियों का कम्प्यूटरीकरण

  3. सामाजिक पूँजी विकास

  4. किसानों को नि:शुल्क बिजली की आपूर्ति

  5. बैंकिंग प्रणाली द्वारा कृषि ऋणों की माफी

  6. सरकारों द्वारा शीतागार सुविधाओं की स्थापना

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

A.

1, 2 और 5

B.

1, 3, 4 और 5

C.

2, 3 और 6

D.

1, 2, 3, 4, 5 और 6

Correct Answer: C

Detailed Solution

कृषि में सार्वजनिक निवेश—Public Investment in Agriculture—से आशय सरकार द्वारा ऐसी भौतिक, तकनीकी, संस्थागत अथवा सामाजिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर किए गए व्यय से है, जिनसे कृषि की उत्पादन क्षमता और उत्पादकता को दीर्घकालीन लाभ प्राप्त होता है।

सिंचाई, ग्रामीण सड़क, कृषि अनुसंधान, भंडारण, बाजार-आधारिक संरचना, डिजिटल संस्थागत क्षमता और मानव संसाधन का विकास सार्वजनिक निवेश के उदाहरण हैं।

1. सभी फसलों के लिए MSP निर्धारित करना—सार्वजनिक निवेश नहीं

MSP मूल्य-समर्थन नीति है। केवल MSP घोषित करने से कोई स्थायी परिसंपत्ति निर्मित नहीं होती। MSP से संबंधित सरकारी खरीद पर व्यय हो सकता है, लेकिन MSP निर्धारित करना अपने-आप में Capital Formation नहीं है।

इसके अतिरिक्त सरकार “सभी फसलों” के लिए MSP घोषित नहीं करती। MSP केवल निर्धारित फसलों के लिए घोषित किया जाता है।

2. प्राथमिक कृषि साख समितियों का कम्प्यूटरीकरण—सार्वजनिक निवेश

Primary Agricultural Credit Societies—PACS—के कम्प्यूटरीकरण से डिजिटल आधारिक संरचना, लेखांकन क्षमता, पारदर्शिता और ग्रामीण ऋण-वितरण प्रणाली में दीर्घकालीन सुधार होता है।

इससे:

  • खातों और Loan Records का डिजिटलीकरण होता है।

  • Audit और Financial Reporting बेहतर हो सकती है।

  • किसानों को ऋण एवं अन्य सेवाएँ अधिक दक्षता से मिल सकती हैं।

  • PACS को जिला केंद्रीय सहकारी बैंक एवं राज्य सहकारी बैंक से बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकता है।

अतः यह संस्थागत एवं Digital Capital के निर्माण से संबंधित सार्वजनिक निवेश है।

3. सामाजिक पूँजी विकास—सार्वजनिक निवेश

Social Capital Development में किसानों के संगठन, सहकारी संस्थाएँ, Farmer Producer Organisations, प्रशिक्षण, कृषि-विस्तार सेवाएँ और समुदाय-आधारित संस्थागत क्षमता शामिल हो सकती है।

इनसे किसानों के बीच:

  • पारस्परिक विश्वास और सहयोग बढ़ता है।

  • सामूहिक खरीद और विपणन संभव होता है।

  • तकनीकी जानकारी का प्रसार होता है।

  • Bargaining Power और बाजार तक पहुँच बेहतर होती है।

इस प्रकार Social Capital में सरकारी निवेश कृषि उत्पादकता और किसानों की दीर्घकालीन क्षमता बढ़ा सकता है।

4. किसानों को नि:शुल्क बिजली—सार्वजनिक निवेश नहीं

नि:शुल्क बिजली मुख्यतः Input Subsidy अथवा Revenue Expenditure है। इससे किसान की वर्तमान सिंचाई लागत कम होती है, लेकिन सीधे कोई नई दीर्घकालीन परिसंपत्ति निर्मित नहीं होती।

यदि सरकार विद्युत वितरण व्यवस्था, कृषि Feeder अथवा Solar Irrigation Infrastructure स्थापित करती है, तो वह निवेश हो सकता है; लेकिन केवल मुफ्त बिजली देना सार्वजनिक निवेश नहीं है।

5. कृषि ऋणों की माफी—सार्वजनिक निवेश नहीं

Loan Waiver किसानों की मौजूदा देनदारी को कम करने वाला वित्तीय राहत उपाय है। इससे सिंचाई, मशीनरी, भंडारण अथवा अन्य उत्पादक परिसंपत्ति स्वतः निर्मित नहीं होती। इसलिए इसे Transfer/Fiscal Relief माना जाएगा, Capital Investment नहीं।

6. सरकार द्वारा शीतागार स्थापित करना—सार्वजनिक निवेश

Cold Storage एक दीर्घकालीन भौतिक परिसंपत्ति है। इससे:

  • कटाई-पश्चात हानि कम होती है।

  • खराब होने वाले उत्पादों की आयु बढ़ती है।

  • किसान तत्काल Distress Sale से बच सकते हैं।

  • कृषि Supply Chain और मूल्य-स्थिरता बेहतर होती है।

  • फल, सब्जी, दुग्ध एवं अन्य शीघ्र खराब होने वाले उत्पादों के विपणन में सहायता मिलती है।

अतः कथन 2, 3 और 6 कृषि में सार्वजनिक निवेश हैं।

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