JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2022

Previous Year Question

भारत में कार्यरत विदेशी-स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स फर्मों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. वे अपने प्लेटफॉर्म को बाज़ार-स्थल के रूप में प्रस्तुत करने के अतिरिक्त अपने स्वयं के माल भी बेच सकती हैं।

  2. उनके प्लेटफॉर्मों पर बड़े विक्रेताओं के स्वामित्व की मात्रा सीमित है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: B

Detailed Solution

भारत की FDI Policy ई-कॉमर्स के दो अलग-अलग मॉडलों को मान्यता देती है:

  1. Marketplace-based Model: ई-कॉमर्स कंपनी खरीदारों और स्वतंत्र विक्रेताओं को जोड़ने के लिए Digital Platform प्रदान करती है।

  2. Inventory-based Model: ई-कॉमर्स कंपनी बेचे जाने वाले माल की Inventory की स्वामी अथवा नियंत्रक होती है और सीधे उपभोक्ताओं को बेचती है।

Marketplace Model में 100% FDI Automatic Route के अंतर्गत अनुमत है, जबकि Inventory-based E-commerce Model में FDI अनुमत नहीं है।

कथन 1 गलत है।

विदेशी निवेश वाली Marketplace E-commerce Entity अपने Platform पर बेची जाने वाली Inventory का स्वामित्व अथवा नियंत्रण नहीं कर सकती। यदि वह माल की स्वामी बनकर सीधे उपभोक्ताओं को बेचती है, तो उसका मॉडल Inventory-based हो जाएगा, जिसमें FDI अनुमत नहीं है।

Marketplace Entity केवल निम्न प्रकार की सेवाएँ प्रदान कर सकती है:

  • Information Technology Platform।

  • Logistics और Warehousing।

  • Payment Collection।

  • Order Processing।

  • Call-centre और ग्राहक सहायता।

  • विक्रेताओं को निष्पक्ष एवं गैर-भेदभावपूर्ण Support Services।

यदि किसी Vendor की Inventory की 25% से अधिक खरीद Marketplace Entity अथवा उसकी Group Companies से होती है, तो ऐसी Inventory को Marketplace Entity द्वारा नियंत्रित माना जा सकता है।

कथन 2 सही है।

FDI Policy के अंतर्गत Marketplace Entity और उसके Platform पर कार्य करने वाले विक्रेताओं के बीच स्वामित्व एवं नियंत्रण पर प्रतिबंध हैं।

Marketplace Entity अथवा उसकी Group Company जिस Vendor में Equity Participation रखती है, उस Vendor को संबंधित Marketplace Platform पर बिक्री करने की अनुमति नहीं होती। इसका उद्देश्य निम्न को रोकना है:

  • Marketplace के नाम पर अप्रत्यक्ष Inventory Control।

  • पसंदीदा विक्रेताओं को अनुचित लाभ।

  • Predatory Pricing।

  • Platform और Seller के बीच ऐसा संबंध जिससे Marketplace स्वयं Retailer की तरह काम करने लगे।

पुरानी नीति में किसी एक Vendor अथवा उसकी Group Companies से Marketplace पर होने वाली कुल बिक्री के मूल्य पर 25% की सीमा भी लागू थी। बाद के संशोधनों ने विशेष रूप से Vendor Ownership, Equity Participation और Inventory Control को नियंत्रित किया।

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