Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारत सरकार रामतिल (Guizotia abyssinica) के बीजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करती है।
रामतिल की खेती खरीफ फसल के रूप में की जाती है।
भारत में कुछ जनजातीय लोग रामतिल के बीज के तेल का उपयोग खाना पकाने के लिए करते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई भी नहीं
Correct Answer: C
Detailed Solution
रामतिल को Niger Seed के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Guizotia abyssinica है। यह एक तिलहनी फसल है, जिसकी खेती मुख्यतः वर्षा-आधारित और जनजातीय क्षेत्रों में की जाती है।
कथन 1 सही है।
केंद्र सरकार जिन अधिदेशित फसलों के लिए Minimum Support Price—MSP घोषित करती है, उनमें रामतिल भी शामिल है। यह MSP वाली खरीफ तिलहनी फसलों में से एक है।
भारत सरकार सामान्यतः 22 अधिदेशित फसलों के लिए MSP घोषित करती है:
14 खरीफ फसलें।
6 रबी फसलें।
2 अन्य वाणिज्यिक फसलें—जूट और खोपरा।
इसके अतिरिक्त गन्ने के लिए Fair and Remunerative Price—FRP निर्धारित की जाती है।
MSP का उद्देश्य किसानों को कीमतों में तेज गिरावट से सुरक्षा देना और उत्पादन संबंधी निर्णयों के लिए मूल्य-संकेत उपलब्ध कराना है। MSP की घोषणा और वास्तविक सरकारी खरीद एक ही बात नहीं हैं; किसी फसल का MSP घोषित होने का अर्थ यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक राज्य में उसकी असीमित सरकारी खरीद होगी।
कथन 2 सही है।
रामतिल एक खरीफ फसल है। इसकी बुवाई सामान्यतः मानसून के आगमन के साथ की जाती है। यह कम उपजाऊ भूमि, सीमित कृषि निवेश और वर्षा-आधारित परिस्थितियों में भी उग सकती है।
इसकी खेती मुख्यतः मध्य एवं पूर्वी भारत के जनजातीय तथा पहाड़ी क्षेत्रों में होती है, जिनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के कुछ क्षेत्र शामिल हैं।
कथन 3 सही है।
रामतिल के बीजों में लगभग 30–40% तेल पाया जा सकता है। अनेक जनजातीय समुदाय इसके तेल का उपयोग खाना पकाने के लिए करते हैं।
इसके अन्य उपयोगों में शामिल हैं:
बीजों से खाद्य तेल प्राप्त करना।
तेल निष्कर्षण के बाद बची Oil Cake का पशु-आहार अथवा जैविक खाद के रूप में उपयोग।
बीजों का चटनी अथवा स्थानीय खाद्य तैयारियों में प्रयोग।
कुछ औद्योगिक एवं पारंपरिक उपयोग।
रामतिल की कम Input Requirement और प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता के कारण इसे कुछ वर्षा-आधारित जनजातीय क्षेत्रों की आजीविका एवं पोषण-सुरक्षा से जुड़ी फसल माना जाता है।