Previous Year Question
कार्ल मार्क्स ने वर्ग संघर्ष की प्रक्रिया को निम्नलिखित में से किस एक सिद्धांत की सहायता से समझाया?
अनुभवाश्रित उदारवाद
अस्तित्ववाद
डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत
द्वंद्वात्मक भौतिकवाद
Correct Answer: D
Detailed Solution
कार्ल मार्क्स ने समाज और इतिहास में होने वाले परिवर्तन की व्याख्या भौतिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर की। उनकी पद्धति को द्वंद्वात्मक भौतिकवाद—Dialectical Materialism—से जोड़ा जाता है।
भौतिकवाद का अर्थ है कि समाज की वास्तविक भौतिक परिस्थितियाँ—जैसे उत्पादन की व्यवस्था, संपत्ति का स्वामित्व, श्रम और आर्थिक संबंध—सामाजिक एवं राजनीतिक संस्थाओं को गहराई से प्रभावित करती हैं।
द्वंद्वात्मकता का अर्थ है कि प्रत्येक सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में अंतर्विरोध मौजूद होते हैं। इन अंतर्विरोधों और संघर्षों के कारण पुरानी व्यवस्था बदलती है तथा नई व्यवस्था विकसित होती है।
मार्क्स के अनुसार उत्पादन व्यवस्था के दो महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं:
उत्पादक शक्तियाँ—Forces of Production: श्रम, औजार, मशीनें, तकनीक और उत्पादन संबंधी ज्ञान।
उत्पादन संबंध—Relations of Production: उत्पादन के साधनों का स्वामित्व तथा विभिन्न वर्गों के बीच आर्थिक संबंध।
जब उत्पादक शक्तियों और उत्पादन संबंधों के बीच अंतर्विरोध बढ़ता है, तो सामाजिक संघर्ष और ऐतिहासिक परिवर्तन की परिस्थितियाँ बनती हैं।
पूँजीवादी व्यवस्था में प्रमुख संघर्ष:
पूँजीपति वर्ग—Bourgeoisie—उत्पादन के साधनों का स्वामी होता है।
श्रमिक वर्ग—Proletariat—अपनी Labour Power बेचता है।
लाभ और मजदूरी से जुड़े विरोधी हित दोनों वर्गों के बीच Class Struggle उत्पन्न करते हैं।
विकल्पों का परीक्षण:
(a) अनुभवाश्रित उदारवाद: यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अनुभव-आधारित ज्ञान से संबंधित परंपराओं का मिश्रित उल्लेख है; मार्क्स के वर्ग संघर्ष का आधार नहीं।
(b) अस्तित्ववाद: यह व्यक्तिगत अस्तित्व, स्वतंत्रता, विकल्प और उत्तरदायित्व पर केंद्रित दर्शन है।
(c) डार्विन का विकासवाद: यह प्राकृतिक चयन द्वारा जैविक विकास की व्याख्या करता है; मार्क्स का वर्ग संघर्ष जैविक विकास सिद्धांत पर आधारित नहीं था।
(d) द्वंद्वात्मक भौतिकवाद: यह भौतिक परिस्थितियों में अंतर्विरोध और संघर्ष के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की व्याख्या करता है।