JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2012

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. मुद्रास्फीति से ऋणियों को लाभ होता है।

  2. मुद्रास्फीति से बंधपत्र-धारकों को लाभ होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: A

Detailed Solution

मुद्रास्फीति के कारण मुद्रा की purchasing power घटती है। इसलिए इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति निश्चित राशि का भुगतान करने वाला debtor है या निश्चित राशि प्राप्त करने वाला creditor/bondholder।

कथन 1 सही है

Debtor वह व्यक्ति या संस्था है जिसने ऋण लिया है और भविष्य में एक निश्चित nominal amount चुकाना है।

यदि ऋण की ब्याज दर fixed है और अप्रत्याशित मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो:

  • चुकाई जाने वाली राशि का वास्तविक मूल्य घटता है।

  • भविष्य की आय और कीमतें बढ़ सकती हैं।

  • ऋण का Real Burden कम हो सकता है।

  • ऋणी कम purchasing power वाली मुद्रा में ऋण लौटाता है।

इसे Fisher relation से समझ सकते हैं:

जहाँ:

r = Real Interest Rate

i = Nominal Interest Rate

π = Inflation Rate

यदि किसी ऋण पर Nominal Interest Rate 8% है और inflation 3% से बढ़कर 7% हो जाती है, तो अनुमानित Real Interest Rate:

8% - 3% = 5%

से घटकर:

8% - 7% = 1%

हो जाती है। इससे ऋणी पर ऋण का वास्तविक भार घटता है।

इसलिए अप्रत्याशित inflation सामान्यतः fixed-rate debtors को लाभ पहुँचाती है।

कथन 2 गलत है

Bondholder सरकार या कंपनी को धन उधार देता है और बदले में सामान्यतः निश्चित coupon तथा maturity पर निश्चित principal प्राप्त करता है।

Inflation बढ़ने पर:

  • निश्चित coupon payment की purchasing power घटती है।

  • maturity पर मिलने वाले principal का वास्तविक मूल्य घटता है।

  • नई securities पर interest rates बढ़ने की संभावना होती है।

  • पुराने fixed-rate bond का market price गिर सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी bond से प्रतिवर्ष ₹8,000 का निश्चित coupon मिलता है, तो 8% inflation के बाद उस ₹8,000 से पहले की तुलना में कम वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदी जा सकेंगी।

इसलिए सामान्य fixed-rate bondholder मुद्रास्फीति से लाभान्वित नहीं, बल्कि हानि उठाता है।

महत्त्वपूर्ण अपवाद

प्रभाव प्रत्येक परिस्थिति में समान नहीं होगा:

  • Inflation-indexed bond का principal या interest inflation से जुड़ा हो सकता है।

  • Floating-rate bond की coupon rate समय के साथ बदल सकती है।

  • यदि expected inflation पहले से nominal interest rate में शामिल है, तो debtor को मिलने वाला अप्रत्याशित लाभ कम हो सकता है।

  • यदि debtor की आय inflation के साथ नहीं बढ़ती, तो nominal repayment करना फिर भी कठिन हो सकता है।

लेकिन सामान्य fixed-rate debt के संदर्भ में UPSC का सिद्धांत स्पष्ट है: inflation debtor को लाभ और creditor/bondholder को हानि पहुँचाती है।

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