Previous Year Question
भारत में किसी फर्म के ‘ब्याज व्याप्ति अनुपात’ पद का क्या महत्त्व है?
यह उस फर्म के वर्तमान जोखिम को समझने में मदद करता है जिसे बैंक ऋण देने जा रहा है।
यह उस फर्म के उभरते जोखिम के मूल्यांकन में मदद करता है जिसे बैंक ऋण देने जा रहा है।
किसी उधारकर्ता फर्म का ब्याज व्याप्ति अनुपात जितना अधिक होगा, अपने ऋण का शोधन करने की उसकी क्षमता उतनी ही खराब होगी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
1 और 2
केवल 2
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Solution
Interest Coverage Ratio अर्थात ICR एक Financial Ratio है, जो यह मापता है कि कोई Firm अपनी Operating Earnings से अपने Interest Expense का कितनी बार भुगतान कर सकती है।
इसका सामान्य सूत्र है:
यहाँ EBIT का अर्थ Earnings Before Interest and Taxes है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी का:
EBIT = ₹12 करोड़;
Annual Interest Expense = ₹4 करोड़;
तो:
इसका अर्थ है कि कंपनी की Operating Earnings उसके Annual Interest Obligation की तीन गुना हैं।
ICR की सामान्य व्याख्या
ICR | सामान्य संकेत |
1 से कम | Operating Earnings, Interest Payment के लिए भी अपर्याप्त हैं। |
लगभग 1 | Interest Payment की क्षमता बहुत कमजोर और संवेदनशील है। |
2 | EBIT, Interest Expense का लगभग दो गुना है; सीमित सुरक्षा उपलब्ध है। |
3 या अधिक | Interest Payment के लिए अपेक्षाकृत बेहतर Cushion उपलब्ध है। |
बहुत अधिक | कम Debt Burden या मजबूत Earnings को दर्शा सकता है। |
स्वीकार्य ICR सभी Industries के लिए समान नहीं होता। Stable Utility Company और Cyclical Construction Company के लिए आवश्यक सुरक्षा-स्तर अलग हो सकता है।
कथन 1 सही है
Bank Loan देने से पहले Bank कंपनी के मौजूदा Financial Statements, EBIT, Interest Expense और Outstanding Debt की जाँच करता है।
वर्तमान ICR से पता चलता है कि:
Firm अभी Interest का भुगतान कर पा रही है या नहीं;
Earnings में गिरावट सहने के लिए कितना Cushion है;
वर्तमान Debt Burden कितना जोखिमपूर्ण है;
Default की तत्काल संभावना कितनी है।
इसलिए ICR Firm के Present Credit Risk को समझने में सहायता करता है।
कथन 2 सही है
Bank केवल एक वर्ष का ICR नहीं देखता। वह कई वर्षों की Trend और भविष्य के Projected Cash Flows का परीक्षण करता है।
उदाहरण के लिए:
वर्ष | EBIT | Interest Expense | ICR |
वर्ष 1 | ₹15 करोड़ | ₹5 करोड़ | 3.0 |
वर्ष 2 | ₹12 करोड़ | ₹5 करोड़ | 2.4 |
वर्ष 3 | ₹8 करोड़ | ₹5 करोड़ | 1.6 |
यह गिरती हुई Trend संकेत देती है कि Firm की Debt-servicing capacity कमजोर हो रही है। भविष्य में Revenue घटने, Interest Rate बढ़ने अथवा नया Debt लेने पर Default Risk और बढ़ सकता है।
इसलिए ICR किसी Firm के Emerging Credit Risk के मूल्यांकन में भी उपयोगी है।
कथन 3 गलत है
कथन में Higher ICR को खराब Debt-servicing ability से जोड़ा गया है, जबकि वास्तविक संबंध इसका उल्टा है।
Higher ICR ⇒ अधिक Earnings Cushion ⇒ बेहतर Interest Servicing Capacity
Lower ICR ⇒ कम Earnings Cushion ⇒ अधिक Credit/Default Risk
यदि Firm-A का ICR 5 है और Firm-B का ICR 0.8 है, तो सामान्यतः Firm-A की Interest Payment capacity अधिक मजबूत होगी। Firm-B की Operating Earnings उसके Interest Expense को भी पूरा नहीं कर रही हैं।
ICR की सीमा
ICR महत्वपूर्ण है, लेकिन Bank केवल इसी अनुपात पर Loan Decision नहीं करता। यह Principal Repayment को सीधे नहीं मापता और EBIT एक Accounting Measure है, वास्तविक Cash Flow नहीं।
इसलिए Bank निम्नलिखित भी देखता है:
Debt Service Coverage Ratio;
Operating Cash Flow;
Debt-equity Ratio;
Collateral;
Business Cycle और Industry Risk;
Loan Repayment History;
Projected Earnings।