JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2021

Previous Year Question

भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, माँग-जनित मुद्रास्फीति निम्नलिखित में से किसके कारण होती है/बढ़ सकती है?

  1. विस्तारवादी नीतियाँ

  2. राजकोषीय प्रोत्साहन

  3. मुद्रास्फीति-सूचकांकित मजदूरी

  4. उच्चतर क्रय शक्ति

  5. बढ़ती ब्याज दरें

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

A.

1, 2 और 4

B.

3, 4 और 5

C.

1, 2, 3 और 5

D.

1, 2, 3, 4 और 5

Correct Answer: A

Detailed Solution

Demand-pull Inflation उस स्थिति में उत्पन्न होती है जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की Aggregate Demand, अर्थव्यवस्था की उपलब्ध उत्पादन-क्षमता अथवा Aggregate Supply की तुलना में तेजी से बढ़ती है।

इसे सामान्यतः इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:

जहाँ:

  • C= Household Consumption

  • I= Private Investment

  • G= Government Expenditure

  • X - M= Net Exports

यदि इन घटकों में वृद्धि के कारण कुल माँग, अर्थव्यवस्था की उत्पादन-क्षमता से आगे निकल जाती है, तो सीमित वस्तुओं और सेवाओं के पीछे अधिक धन खर्च होने लगता है। इससे कीमतें बढ़ती हैं।

कथन 1: विस्तारवादी नीतियाँ — सही

Expansionary Policies का उद्देश्य Economic Activity और Aggregate Demand बढ़ाना होता है। इनमें Expansionary Fiscal Policy और Expansionary Monetary Policy दोनों सम्मिलित हो सकती हैं।

इन नीतियों में शामिल हैं:

  • Government Expenditure बढ़ाना;

  • Tax Rates कम करना;

  • Policy Interest Rate घटाना;

  • Banking System में Liquidity बढ़ाना;

  • Credit की उपलब्धता बढ़ाना।

इन उपायों से Disposable Income, Consumption, Borrowing और Investment बढ़ सकते हैं। यदि अर्थव्यवस्था पहले से अपनी उत्पादन-क्षमता के निकट हो, तो अतिरिक्त माँग Output की अपेक्षा कीमतों को अधिक बढ़ा सकती है। इसलिए कथन 1 सही है।

कथन 2: राजकोषीय प्रोत्साहन — सही

Fiscal Stimulus में सरकार Expenditure बढ़ाती है, Taxes कम करती है अथवा दोनों उपाय अपनाती है।

उदाहरण के लिए, यदि सरकार Infrastructure पर ₹1 लाख करोड़ अतिरिक्त खर्च करती है, तो Contractors, Workers और Input Suppliers की आय बढ़ती है। वे इस आय का एक भाग पुनः Consumption पर खर्च करते हैं। इससे Multiplier Effect के माध्यम से Aggregate Demand प्रारम्भिक सरकारी व्यय से अधिक बढ़ सकती है।

यदि यह माँग उपलब्ध Supply से अधिक हो जाए, तो Demand-pull Inflation उत्पन्न हो सकती है। इसलिए कथन 2 सही है।

कथन 3: मुद्रास्फीति-सूचकांकित मजदूरी — गलत

Inflation-indexed Wages में कर्मचारियों की मजदूरी को Inflation Index के अनुसार समायोजित किया जाता है, ताकि उनकी Real Purchasing Power सुरक्षित रहे।

उदाहरण के लिए, यदि मजदूरी ₹30,000 प्रति माह है और Indexation के कारण 6% बढ़ती है, तो नई मजदूरी होगी:

इससे Consumption Demand को कुछ समर्थन मिल सकता है। लेकिन Wage Indexation को मुख्यतः Demand-pull Inflation का मूल कारण नहीं माना जाता। यह पहले से मौजूद Inflation को Wages में स्थानांतरित कर सकती है और Firms की Production Cost बढ़ाकर Cost-push Inflation अथवा Wage-price spiral को बनाए रख सकती है।

इसलिए प्रश्न के वर्गीकरण में कथन 3 शामिल नहीं है।

कथन 4: उच्चतर क्रय शक्ति — सही

Households की Purchasing Power बढ़ने पर वे अधिक वस्तुओं और सेवाओं की माँग कर सकते हैं।

Purchasing Power निम्न कारणों से बढ़ सकती है:

  • Income या Wages बढ़ने से;

  • Taxes कम होने से;

  • Government Cash Transfers से;

  • Credit सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने से;

  • Employment बढ़ने से।

यदि Consumption में वृद्धि के अनुरूप Production नहीं बढ़ता, तो माँग और आपूर्ति के बीच अंतर कीमतों को ऊपर ले जाता है। इसलिए Higher Purchasing Power Demand-pull Inflation को बढ़ा सकती है।

कथन 5: बढ़ती ब्याज दरें — गलत

Interest Rates बढ़ने पर:

  • Housing और Vehicle Loans महँगे होते हैं;

  • Consumer Credit की माँग घटती है;

  • Business Investment की Financing Cost बढ़ती है;

  • Savings अपेक्षाकृत आकर्षक होती है;

  • Consumption और Investment की वृद्धि धीमी होती है।

इस प्रकार बढ़ती ब्याज दरें सामान्यतः Aggregate Demand और Demand-pull Inflation को कम करती हैं, न कि बढ़ाती हैं।

Interest Rate↑ ⇒ Borrowing↓ ⇒ Consumption/Investment↓ ⇒ Aggregate Demand↓

अतः कथन 1, 2 और 4 सही हैं। सही उत्तर (a) है।

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