Previous Year Question
भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006’ के अनुसार, ‘मध्यम उद्यम’ वे हैं जिनका संयंत्र और मशीनरी में निवेश ₹15 करोड़ और ₹25 करोड़ के बीच है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिए गए सभी बैंक ऋण प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र के अधीन अर्ह हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है।
MSMED Act, 2006 के अंतर्गत Enterprises का वर्गीकरण समय-समय पर Government Notification द्वारा संशोधित किया जा सकता है। वर्ष 2023 में लागू वर्गीकरण Investment और Annual Turnover के Composite Criteria पर आधारित था।
वर्ष 2023 में लागू MSME वर्गीकरण
उद्यम | Plant and Machinery अथवा Equipment में अधिकतम Investment | अधिकतम Annual Turnover |
Micro Enterprise | ₹1 करोड़ | ₹5 करोड़ |
Small Enterprise | ₹10 करोड़ | ₹50 करोड़ |
Medium Enterprise | ₹50 करोड़ | ₹250 करोड़ |
दोनों शर्तें साथ-साथ लागू होती थीं। यदि कोई Enterprise Investment अथवा Turnover में अपनी श्रेणी की किसी एक सीमा को भी पार कर देता था, तो वह अगली श्रेणी में चला जाता था।
इसलिए वर्ष 2023 में Medium Enterprise की पहचान ₹15 करोड़ से ₹25 करोड़ के बीच Investment के आधार पर नहीं की जाती थी। Medium Enterprise के लिए अधिकतम Investment Limit ₹50 करोड़ और अधिकतम Turnover Limit ₹250 करोड़ थी।
यह कथन पुराने मूल वर्गीकरण से भी मेल नहीं खाता। MSMED Act, 2006 के पुराने Manufacturing classification में Medium Enterprise के लिए Plant and Machinery में Investment ₹5 करोड़ से अधिक, लेकिन ₹10 करोड़ से अधिक नहीं था। अतः ₹15-25 करोड़ की सीमा किसी लागू वर्गीकरण से मेल नहीं खाती।
वर्तमान तथ्य: 1 अप्रैल 2025 से संशोधित वर्गीकरण में Medium Enterprise के लिए Investment Limit ₹125 करोड़ और Turnover Limit ₹500 करोड़ कर दी गई है। लेकिन 2023 के इस प्रश्न का उत्तर उस समय लागू ₹50 करोड़ और ₹250 करोड़ वाली सीमा के आधार पर निर्धारित होगा।
कथन 2 सही है।
RBI की Priority Sector Lending Directions स्पष्ट रूप से कहती हैं कि MSMEs को दिए गए सभी Bank Loans, निर्धारित MSME परिभाषा और नियमों के अधीन, Priority Sector Lending के अंतर्गत वर्गीकृत होने के योग्य हैं।
Priority Sector में MSME को शामिल करने का उद्देश्य:
छोटे उद्यमों तक Institutional Credit पहुँचाना;
उनके लिए Formal Banking Finance उपलब्ध कराना;
उत्पादन, रोजगार और Entrepreneurship को बढ़ावा देना;
Informal Credit Sources पर निर्भरता घटाना;
Working Capital और Term Loan की उपलब्धता सुधारना है।
यहाँ “Priority Sector में अर्ह” होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक MSME को Loan मिलना अनिवार्य है या उसे हमेशा Subsidised Interest Rate पर ऋण मिलेगा। इसका अर्थ केवल यह है कि पात्र MSME को दिया गया Bank Loan, RBI के नियमों के अनुसार Bank के Priority Sector Lending achievement में गिना जा सकता है।
RBI के सामान्य Priority Sector targets में Domestic Commercial Banks के लिए कुल Priority Sector Lending Target सामान्यतः Adjusted Net Bank Credit अथवा Credit Equivalent of Off-Balance Sheet Exposure—दोनों में से जो अधिक हो—का 40% निर्धारित किया गया था। Micro Enterprises के लिए अलग 7.5% sub-target भी था।