Previous Year Question
केन्द्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
डिजिटल मुद्रा में भुगतान अमेरिकी डॉलर अथवा SWIFT प्रणाली का उपयोग किए बिना करना संभव है।
डिजिटल मुद्रा को उसमें क्रमादेशित किसी शर्त, जैसे उसे खर्च करने की समय-सीमा, के साथ वितरित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: C
Detailed Solution
Central Bank Digital Currency अर्थात CBDC किसी देश के Central Bank द्वारा जारी Sovereign Currency का Digital Form है। भारत में इसे Digital Rupee अथवा e₹ कहा जाता है।
CBDC और Bank Deposit में प्रमुख अंतर यह है कि Bank Deposit संबंधित Commercial Bank की Liability होता है, जबकि CBDC सीधे Central Bank की Liability होता है। RBI के अनुसार e₹ वर्तमान कागजी मुद्रा के साथ 1:1 अनुपात में परिवर्तनीय है तथा Legal Tender के रूप में कार्य करता है।
कथन 1 सही है।
वर्तमान Cross-border payment व्यवस्था में प्रायः Correspondent Banks, Messaging Networks और कभी-कभी अमेरिकी डॉलर जैसी Vehicle Currency की आवश्यकता पड़ती है। उदाहरण के लिए, दो अलग-अलग देशों की मुद्राओं में भुगतान पहले अमेरिकी डॉलर में परिवर्तित किया जा सकता है और फिर प्राप्तकर्ता की मुद्रा में।
अलग-अलग देशों की CBDC प्रणालियों के बीच Interoperability अथवा साझा CBDC Bridge स्थापित होने पर दो देशों की Digital Currencies का प्रत्यक्ष विनिमय और निपटान संभव हो सकता है। इससे:
अमेरिकी डॉलर जैसी मध्यवर्ती Currency का प्रयोग आवश्यक नहीं रहेगा;
भुगतान को अनिवार्य रूप से SWIFT messaging network से भेजने की आवश्यकता नहीं होगी;
Correspondent Banking की कई मध्यवर्ती परतें हट सकती हैं;
Cross-border payment की लागत और Settlement Time कम हो सकता है;
अलग-अलग Time Zones के कारण होने वाली देरी कम हो सकती है।
SWIFT स्वयं धन का Settlement नहीं करता; वह मुख्यतः Financial Messaging System है। CBDC आधारित व्यवस्था में Messaging और Settlement दोनों के लिए वैकल्पिक तकनीकी संरचना विकसित की जा सकती है।
कथन 2 सही है।
CBDC में Programmability की सुविधा हो सकती है। इसका अर्थ है कि Digital Currency के उपयोग के साथ कुछ Computer-coded conditions जोड़ी जा सकती हैं।
उदाहरण के लिए:
कृषि-ऋण से संबंधित Digital Currency को केवल अधिकृत कृषि-input stores पर खर्च करने योग्य बनाया जा सकता है।
किसी सरकारी सहायता को केवल खाद्य, उर्वरक अथवा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपयोग करने की शर्त लगाई जा सकती है।
CBDC Token में Expiry Date जोड़ी जा सकती है, जिसके भीतर उसे खर्च करना आवश्यक हो।
भुगतान को किसी विशेष क्षेत्र, व्यक्ति-श्रेणी अथवा Merchant Category तक सीमित किया जा सकता है।
Smart Contract के माध्यम से शर्त पूरी होने पर भुगतान स्वतः निष्पादित किया जा सकता है।
RBI के CBDC Concept Note में विशेष रूप से बताया गया है कि Tokens में Expiry Date निर्धारित की जा सकती है। इसलिए प्रश्न में दी गई “खर्च करने की समय-सीमा” Programmability का सही उदाहरण है।
हालाँकि, ऐसी Programmability लागू करते समय Currency की Fungibility, Privacy और सार्वभौमिक स्वीकार्यता पर पड़ने वाले प्रभावों का ध्यान रखना आवश्यक होगा।
अतिरिक्त तथ्य: RBI ने Wholesale Digital Rupee Pilot को 1 नवंबर 2022 और Retail Digital Rupee Pilot को 1 दिसंबर 2022 से प्रारम्भ किया था।