JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2011

Previous Year Question

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक दर को कम करने से क्या होता है?

A.

बाजार में अधिक तरलता

B.

बाजार में कम तरलता

C.

बाजार की तरलता में कोई परिवर्तन नहीं

D.

वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अधिक जमाराशियों का संग्रहण

Correct Answer: A

Detailed Solution

बैंक दर (Bank Rate) वह मानक दर है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक विनिमय-पत्रों अथवा अन्य पात्र वाणिज्यिक पत्रों को खरीदने या उनका पुनर्बट्टाकरण करने के लिए तैयार रहता है। परंपरागत रूप से यह केंद्रीय बैंक की दीर्घकालिक ऋण एवं मौद्रिक नीति की दिशा को दर्शाने वाली दर रही है।

बैंक दर में कमी एक विस्तारवादी मौद्रिक उपाय (Expansionary Monetary Measure) है। इसका प्रभाव निम्न प्रकार से अर्थव्यवस्था तक पहुँचता है:

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक से धन प्राप्त करने की लागत कम होने का संकेत मिलता है।

  2. वाणिज्यिक बैंकों की निधियों की लागत कम होने की संभावना बढ़ती है।

  3. बैंक अपनी ऋण दरों को कम कर सकते हैं।

  4. कम ब्याज दर पर उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और उपभोक्ताओं द्वारा ऋण की माँग बढ़ती है।

  5. बैंकों द्वारा अधिक ऋण दिए जाने से Credit Creation और मुद्रा की उपलब्धता बढ़ती है।

  6. परिणामस्वरूप बाजार में तरलता बढ़ती है तथा निवेश और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है।

इसलिए बैंक दर कम करने का सामान्य परिणाम बाजार में अधिक तरलता होता है।

विकल्पों का परीक्षण:

  • विकल्प (a) सही है: कम बैंक दर ऋण-विस्तार को प्रोत्साहित करती है, जिससे बाजार में मुद्रा और ऋण की उपलब्धता बढ़ती है।

  • विकल्प (b) गलत है: बाजार में तरलता कम करने के लिए सामान्यतः बैंक दर बढ़ाई जाती है। इससे ऋण महँगा होता है और साख-विस्तार घटता है।

  • विकल्प (c) गलत है: बैंक दर में परिवर्तन मौद्रिक परिस्थितियों, ऋण की लागत और तरलता को प्रभावित कर सकता है; इसलिए कोई परिवर्तन न होना सामान्य परिणाम नहीं है।

  • विकल्प (d) गलत है: जमाराशियों का संग्रहण मुख्यतः बैंकों की जमा ब्याज दरों, आय, बचत की प्रवृत्ति और वित्तीय उत्पादों के आकर्षण पर निर्भर करता है। बैंक दर घटने का प्रत्यक्ष उद्देश्य जमाराशियाँ बढ़ाना नहीं, बल्कि ऋण और तरलता का विस्तार करना होता है।

उलटी स्थिति: यदि भारतीय रिज़र्व बैंक बैंक दर बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए धन की लागत बढ़ने, ऋण महँगा होने, Credit Creation घटने तथा बाजार की तरलता कम होने की संभावना रहती है। इसका प्रयोग मुद्रास्फीतिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।

महत्त्वपूर्ण तथ्य: फरवरी 2012 से भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक दर को Marginal Standing Facility Rate के साथ संरेखित कर दिया। अतः वर्तमान मौद्रिक परिचालन में Repo Rate प्रमुख नीतिगत दर है, जबकि बैंक दर कई वैधानिक और दंडात्मक ब्याज प्रावधानों के लिए संदर्भ दर के रूप में भी प्रयुक्त होती है। प्रश्न का उत्तर, हालांकि, बैंक दर के परंपरागत मौद्रिक प्रभाव के आधार पर दिया गया है।

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