JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2010

Previous Year Question

भारत के संदर्भ में निम्नलिखित पर विचार कीजिए:

  1. बैंकों का राष्ट्रीयकरण

  2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का गठन

  3. बैंक शाखाओं द्वारा गाँवों को अपनाना

उपर्युक्त में से किसे भारत में ‘वित्तीय समावेशन’ प्राप्त करने के लिए उठाए गए कदम माना जा सकता है?

A.

1 और 2

B.

2 और 3

C.

केवल 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: D

Detailed Solution

वित्तीय समावेशन का अर्थ समाज के वंचित, निम्न-आय और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उचित लागत पर बचत, ऋण, भुगतान, बीमा और अन्य औपचारिक वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराना है।

कथन 1 सही है। बैंकों का राष्ट्रीयकरण वित्तीय समावेशन की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम था।

भारत में 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का 19 जुलाई 1969 को राष्ट्रीयकरण किया गया। वर्ष 1980 में छह अन्य बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। इसका उद्देश्य बैंकिंग संसाधनों को केवल बड़े उद्योगों तक सीमित न रखकर कृषि, लघु उद्योग, कमजोर वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर निर्देशित करना था।

राष्ट्रीयकरण के बाद ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंक शाखाओं का विस्तार हुआ तथा प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्रों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर बल बढ़ा।

कथन 2 सही है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks—RRBs) का गठन ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और सीमांत किसानों, कृषि श्रमिकों, कारीगरों तथा छोटे उद्यमियों को बैंकिंग और ऋण सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए किया गया।

पहले पाँच RRBs ने 2 अक्टूबर 1975 को कार्य प्रारम्भ किया। इसके बाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 ने इन्हें वैधानिक आधार प्रदान किया। इसलिए पुस्तक में इनके गठन का वर्ष 1982 बताया जाना सही नहीं होगा।

कथन 3 सही है। बैंक शाखाओं द्वारा गाँवों को अपनाने का उद्देश्य चयनित गाँवों में बैंकिंग और ऋण सेवाओं का सघन विस्तार करना था। संबंधित शाखा गाँव की ऋण आवश्यकताओं का आकलन करके कृषि, पशुपालन, ग्रामीण कारीगरी और अन्य उत्पादक गतिविधियों के लिए संस्थागत वित्त उपलब्ध कराती थी।

इससे ग्रामीण परिवारों की साहूकारों पर निर्भरता कम करने और उन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में सहायता मिली। इसलिए इसे भी वित्तीय समावेशन का कदम माना जा सकता है।

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