JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2011

Previous Year Question

भारत के वित्त आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

A.

यह अवसंरचना विकास के लिए विदेशी पूंजी के अंतर्वाह को प्रोत्साहित करता है।

B.

यह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच वित्त के समुचित वितरण को सुकर बनाता है।

C.

यह वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

D.

इस संदर्भ में उपर्युक्त (a), (b) और (c) में से कोई भी कथन सही नहीं है।

Correct Answer: D

Detailed Solution

वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। इसका गठन राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत प्रत्येक पाँचवें वर्ष अथवा आवश्यकता पड़ने पर उससे पहले किया जाता है।

वित्त आयोग का मुख्य कार्य संघ और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण के संबंध में राष्ट्रपति को सिफारिशें देना है। इसके प्रमुख संवैधानिक कार्य हैं:

  • संघ और राज्यों के बीच विभाज्य करों की निवल प्राप्तियों का वितरण तथा राज्यों के बीच उनके हिस्से का आवंटन।

  • भारत की संचित निधि से राज्यों को दिए जाने वाले सहायता अनुदानों को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों की सिफारिश।

  • राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपाय सुझाना।

  • सुदृढ़ वित्त के हित में राष्ट्रपति द्वारा आयोग को भेजे गए अन्य विषयों पर सिफारिश करना।

विकल्प (a) सही नहीं है। अवसंरचना के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करना वित्त आयोग का संवैधानिक कार्य नहीं है। यह विषय मुख्यतः आर्थिक नीति, विदेशी निवेश नीति तथा केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और विभागों से जुड़ा है।

विकल्प (b) सही नहीं है। वित्त आयोग सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच वित्त का वितरण नहीं करता। इसका प्रमुख वितरणात्मक कार्य संघ और राज्यों के बीच तथा राज्यों के परस्पर कर-राजस्व के बँटवारे से संबंधित है।

यहाँ Public Sector Undertakings और Union-State fiscal relations के बीच अंतर महत्त्वपूर्ण है। वित्त आयोग दूसरे विषय से संबंधित है।

विकल्प (c) सही नहीं है। वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता एक व्यापक सुशासन उद्देश्य हो सकता है, लेकिन इसे अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग का स्वतंत्र और मुख्य संवैधानिक कार्य नहीं बनाया गया है।

वित्त आयोग राजकोषीय अनुशासन, ऋण, घाटे अथवा अनुदानों के संबंध में सुझाव दे सकता है, लेकिन इसका संवैधानिक उद्देश्य केवल वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना नहीं है।

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