JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2014

Previous Year Question

समाचारों में कभी-कभी दिखाई देने वाले ‘सीमांत स्थायी सुविधा दर’ और ‘निवल माँग और मीयादी देयताएँ’ पद किसके संदर्भ में प्रयुक्त होते हैं?

A.

बैंकिंग परिचालन

B.

संचार नेटवर्किंग

C.

सैन्य रणनीतियाँ

D.

कृषि उत्पादों की आपूर्ति और माँग

Correct Answer: A

Detailed Solution

सीमांत स्थायी सुविधा दर (Marginal Standing Facility Rate—MSF Rate) और निवल माँग और मीयादी देयताएँ (Net Demand and Time Liabilities—NDTL), दोनों बैंकिंग व्यवस्था एवं RBI के मौद्रिक और तरलता प्रबंधन से संबंधित पद हैं।

सीमांत स्थायी सुविधा (MSF): यह RBI द्वारा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को उपलब्ध कराई जाने वाली एक अल्पकालीन उधार सुविधा है। इसके अंतर्गत पात्र बैंक अनुमत सरकारी प्रतिभूतियों के विरुद्ध RBI से सामान्यतः रातभर के लिए धन प्राप्त कर सकते हैं।

इसका उपयोग मुख्यतः उस समय किया जाता है जब बैंक को अस्थायी और आकस्मिक तरलता की कमी का सामना करना पड़ता है। MSF Rate सामान्यतः Repo Rate से अधिक रखी जाती है, इसलिए यह नियमित वित्तपोषण की अपेक्षा आकस्मिक तरलता सुविधा के रूप में कार्य करती है।

निवल माँग और मीयादी देयताएँ (NDTL): यह बैंकों की माँग देयताओं और मीयादी देयताओं का निवल योग है।

  • माँग देयताएँ वे देयताएँ हैं जिन्हें बैंक को माँग किए जाने पर चुकाना होता है, जैसे चालू खातों की जमाराशियाँ और बचत खातों का माँग वाला भाग।

  • मीयादी देयताएँ वे देयताएँ हैं जो एक निर्धारित अवधि के बाद देय होती हैं, जैसे सावधि जमाराशियाँ।

  • अन्य बैंकों के साथ कुछ निर्धारित देयताओं और परिसंपत्तियों का समायोजन करके NDTL निर्धारित किया जाता है।

CRR और SLR जैसी आरक्षित निधि संबंधी अपेक्षाओं की गणना NDTL के निश्चित प्रतिशत के रूप में की जाती है। इसलिए NDTL किसी बैंक की आरक्षित निधि संबंधी बाध्यताओं का आधार है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.