Previous Year Question
जब भारतीय रिज़र्व बैंक सांविधिक चलनिधि अनुपात को 50 आधार अंक कम करता है, तो निम्नलिखित में से क्या होने की संभावना है?
भारत की GDP वृद्धि दर में अत्यधिक वृद्धि होगी।
विदेशी संस्थागत निवेशक हमारे देश में अधिक पूँजी ला सकते हैं।
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपनी उधार दरों में कटौती कर सकते हैं।
इससे बैंकिंग प्रणाली में चलनिधि अत्यधिक कम हो सकती है।
Correct Answer: C
Detailed Solution
Statutory Liquidity Ratio—SLR बैंकों की निवल माँग और मीयादी देयताओं का वह न्यूनतम प्रतिशत है जिसे उन्हें निर्धारित चल परिसंपत्तियों में बनाए रखना होता है।
इन परिसंपत्तियों में मुख्यतः निम्नलिखित सम्मिलित हैं:
नकदी;
स्वर्ण;
भाररहित अनुमोदित प्रतिभूतियाँ, जिनमें प्रमुखतः सरकारी प्रतिभूतियाँ शामिल हैं।
एक आधार अंक—Basis Point—प्रतिशत के सौवें भाग के बराबर होता है:
1 आधार अंक = 0.01%
अतः:
50 आधार अंक = 0.50 प्रतिशत अंक
विकल्प (c) सही है।
SLR कम होने पर बैंकों को अपनी जमाओं का अपेक्षाकृत कम भाग अनिवार्य चल परिसंपत्तियों में रखना पड़ता है। इससे उनके पास ऋण देने अथवा अन्य अनुमत कार्यों के लिए अधिक निधि उपलब्ध हो सकती है।
ऋण-योग्य संसाधनों की उपलब्धता बढ़ने पर बैंकों की निधि संबंधी बाधा कम हो सकती है। प्रतिस्पर्धा और ऋण की माँग जैसी स्थितियाँ अनुकूल होने पर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपनी Lending Rates में कटौती कर सकते हैं।
यहाँ “कर सकते हैं” महत्त्वपूर्ण है। SLR में कटौती के बाद ऋण दर का कम होना निश्चित नहीं है। यह बैंक की निधि-लागत, Credit Risk, ऋण की माँग, पूँजी-पर्याप्तता और बाजार परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
विकल्प (a) सही नहीं है।
SLR में कटौती से ऋण और निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है, लेकिन इससे GDP की वृद्धि दर में तत्काल और अत्यधिक वृद्धि होना आवश्यक नहीं है। आर्थिक वृद्धि उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय, निर्यात, उत्पादन क्षमता और वैश्विक परिस्थितियों सहित अनेक कारकों पर निर्भर करती है।
विकल्प (b) सही नहीं है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों के पूँजी प्रवाह पर वैश्विक ब्याज दरों, विनिमय दर, भारतीय प्रतिभूतियों के प्रतिफल, जोखिम-धारणा और नीतिगत स्थिरता का प्रभाव पड़ता है। SLR में 50 आधार अंकों की कटौती से FII पूँजी का अधिक आगमन इसका प्रत्यक्ष और सर्वाधिक संभावित परिणाम नहीं है।
विकल्प (d) सही नहीं है।
SLR में कटौती से बैंकिंग प्रणाली की उपलब्ध चलनिधि कम नहीं, बल्कि बढ़ने की संभावना होती है, क्योंकि बैंकों की कम निधि अनिवार्य SLR परिसंपत्तियों में बँधी रहती है।