Previous Year Question
भारत में लघु वित्त बैंकों की स्थापना का क्या उद्देश्य है?
लघु व्यवसाय इकाइयों को ऋण उपलब्ध कराना
छोटे और सीमांत कृषकों को ऋण उपलब्ध कराना
युवा उद्यमियों को, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Solution
Small Finance Banks—SFBs के लिए RBI ने वर्ष 2014 में लाइसेंस संबंधी दिशानिर्देश जारी किए थे। इनकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाना और उन वर्गों को बचत तथा ऋण सुविधाएँ उपलब्ध कराना है जिन्हें परंपरागत बैंकिंग प्रणाली से पर्याप्त सेवाएँ नहीं मिली थीं।
कथन 1 सही है।
SFBs को छोटी व्यवसाय इकाइयों, सूक्ष्म और लघु उद्योगों तथा असंगठित क्षेत्र की संस्थाओं को ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया।
छोटे व्यवसायों को सामान्यतः पर्याप्त जमानत, औपचारिक वित्तीय अभिलेख और Credit History के अभाव में संस्थागत ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है। SFBs स्थानीय जानकारी, छोटे आकार के ऋण और उपयुक्त बैंकिंग उत्पादों के माध्यम से इस अंतर को कम कर सकते हैं।
कथन 2 सही है।
छोटे और सीमांत कृषक SFBs के लक्षित ऋणग्राही वर्ग में स्पष्ट रूप से शामिल हैं। इन बैंकों से कृषि, संबद्ध गतिविधियों, कृषि उपकरण, पशुपालन और अन्य उत्पादक ग्रामीण कार्यों के लिए संस्थागत ऋण की उपलब्धता बढ़ने की अपेक्षा की गई।
RBI के मूल लाइसेंसिंग ढाँचे में SFB को अपने समायोजित निवल बैंक ऋण का निर्धारित भाग Priority Sector Lending में देना आवश्यक था। साथ ही ऋण-पोर्टफोलियो का एक निर्धारित अनुपात छोटे आकार के ऋणों में रखना था, ताकि बैंक केवल बड़े उधारकर्ताओं पर केंद्रित न हो जाए।
कथन 3 सही नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों में युवा उद्यमियों द्वारा व्यवसाय स्थापित करना SFB से मिलने वाले ऋण का संभावित परिणाम हो सकता है। लेकिन RBI द्वारा निर्धारित SFB के मूल उद्देश्यों में इसे एक अलग और स्पष्ट स्थापना-उद्देश्य के रूप में उल्लिखित नहीं किया गया था।
SFB का आधिकारिक उद्देश्य सेवावंचित वर्गों को बचत-सुविधा और निम्नलिखित वर्गों को ऋण उपलब्ध कराना था:
छोटे व्यवसाय;
छोटे और सीमांत कृषक;
सूक्ष्म एवं लघु उद्योग;
असंगठित क्षेत्र की संस्थाएँ।
इसलिए कथन 3 को केवल सामान्य विकासात्मक लाभ के आधार पर सही नहीं माना जा सकता।