Previous Year Question
यदि सरकार द्वारा कोई वस्तु जनता को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, तो
अवसर लागत शून्य होती है।
अवसर लागत की उपेक्षा की जाती है।
अवसर लागत वस्तु के उपभोक्ताओं से कर देने वाली जनता को अंतरित हो जाती है।
अवसर लागत वस्तु के उपभोक्ताओं से सरकार को अंतरित हो जाती है।
Correct Answer: C
Detailed Solution
Opportunity Cost किसी वस्तु अथवा सेवा को प्राप्त करने के लिए त्यागे गए अगले सर्वोत्तम विकल्प का मूल्य है। किसी वस्तु का बाजार-मूल्य शून्य होने से उसकी Opportunity Cost अनिवार्य रूप से शून्य नहीं हो जाती।
विकल्प (c) सही है।
सरकार द्वारा किसी वस्तु को उपभोक्ता के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने का अर्थ यह है कि उपभोक्ता से उस वस्तु की प्रत्यक्ष कीमत नहीं ली जा रही। लेकिन उस वस्तु के उत्पादन, खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण में श्रम, पूँजी, भूमि, ऊर्जा और प्रशासनिक संसाधनों का प्रयोग होता है।
सरकार इस व्यय को मुख्यतः कर-राजस्व अथवा अन्य सार्वजनिक संसाधनों से पूरा करती है। इसलिए उपभोक्ता के स्थान पर करदाता जनता उस वस्तु की वित्तीय लागत वहन करती है। इन्हीं संसाधनों का प्रयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, आधारिक संरचना अथवा किसी अन्य कार्यक्रम पर किया जा सकता था। त्यागा गया यह अगला सर्वोत्तम उपयोग वास्तविक अवसर लागत है।
उदाहरण के लिए, सरकार ₹1,000 करोड़ की वस्तुएँ निःशुल्क वितरित करती है। उपभोक्ता से कीमत नहीं ली जाती, लेकिन ₹1,000 करोड़ के सार्वजनिक संसाधन किसी वैकल्पिक परियोजना पर खर्च नहीं किए जा सकते। इसलिए वस्तु उपभोक्ता के लिए निःशुल्क है, अर्थव्यवस्था के लिए लागत-रहित नहीं।
विकल्प (a) सही नहीं है।
अवसर लागत तभी शून्य हो सकती है जब संसाधन दुर्लभ न हों और उनका कोई वैकल्पिक उपयोग न हो। सार्वजनिक धन और उत्पादन के साधन दुर्लभ हैं; इसलिए उनकी अवसर लागत होती है।
विकल्प (b) सही नहीं है।
लागत की उपेक्षा करने और लागत का अस्तित्व न होने में अंतर है। सरकार या उपभोक्ता अवसर लागत की गणना न करें, तब भी वैकल्पिक उपयोग का त्याग वास्तविक रहता है।
विकल्प (d) सर्वोत्तम उत्तर नहीं है।
सरकार कोई स्वतंत्र अंतिम संसाधन-स्रोत नहीं है। उसका व्यय करों, गैर-कर राजस्व, उधारी अथवा अन्य सार्वजनिक प्राप्तियों से पूरा होता है। दिए गए विकल्पों में करदाता जनता को लागत का अंतरण अधिक उपयुक्त आर्थिक वर्णन है।