Previous Year Question
भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग के अभिशासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूँजी डालने की मात्रा पिछले दशक में निरंतर बढ़ी है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सुव्यवस्थित करने के लिए सहयोगी बैंकों का मूल भारतीय स्टेट बैंक में विलय कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही नहीं है।
भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूँजी-पर्याप्तता मजबूत करने, ऋण-वृद्धि में सहायता देने और गैर-निष्पादित आस्तियों से उत्पन्न दबाव का सामना करने के लिए विभिन्न वर्षों में पूँजी उपलब्ध कराई है।
लेकिन पूँजी डालने की मात्रा प्रत्येक वर्ष निरंतर अथवा समान गति से नहीं बढ़ी। यह निम्नलिखित परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रही:
संबंधित बैंक की पूँजी-पर्याप्तता;
गैर-निष्पादित आस्तियों और प्रावधानों की मात्रा;
RBI के नियामकीय मानदंड;
सरकार की बजटीय स्थिति;
बैंकों द्वारा बाजार से स्वयं जुटाई गई पूँजी;
विलय और बैंकिंग-सुधार की आवश्यकताएँ।
“निरंतर बढ़ी है” का अर्थ प्रत्येक आगामी वर्ष में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि होना है। सरकारी पूँजी-निवेश के आँकड़े ऐसी लगातार बढ़ती प्रवृत्ति नहीं दिखाते। इसलिए कथन 1 गलत है।
कथन 2 सही है।
भारतीय स्टेट बैंक के पाँच सहयोगी बैंकों का 1 अप्रैल 2017 से SBI में विलय प्रभावी हुआ:
स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर;
स्टेट बैंक ऑफ मैसूर;
स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर;
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला;
स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद।
भारतीय महिला बैंक का भी SBI में विलय किया गया।
इस विलय का उद्देश्य SBI समूह की बिखरी हुई संरचना को एकीकृत करना, पूँजी एवं संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग करना, एकरूप प्रौद्योगिकी और Risk Management अपनाना तथा संचालन की पुनरावृत्ति और लागत कम करना था।
विलय से बैंक का शाखा-जाल, जमा-आधार और ऋण-पोर्टफोलियो एक संस्था के अंतर्गत आ गए। बड़े संयुक्त Balance Sheet से पूँजी जुटाने, बड़े ऋणों का प्रबंधन करने और जोखिमों का विविधीकरण करने की क्षमता भी बढ़ सकती थी।