Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा एक ऐसा सर्वाधिक संभावित उपाय नहीं है जिसे सरकार/RBI भारतीय रुपए के मूल्य में गिरावट रोकने के लिए अपनाता है?
गैर-आवश्यक वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाना और निर्यात को प्रोत्साहित करना
भारतीय उधारकर्ताओं को रुपए में मूल्यवर्गित मसाला बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित करना
बाह्य वाणिज्यिक उधार से संबंधित शर्तों को आसान बनाना
विस्तारवादी मौद्रिक नीति अपनाना
Correct Answer: D
Detailed Solution
रुपए के मूल्य में गिरावट का अर्थ है कि विदेशी मुद्रा—विशेष रूप से डॉलर—की तुलना में रुपया कमजोर हो रहा है। उदाहरण के लिए, विनिमय दर ₹70 प्रति डॉलर से बढ़कर ₹80 प्रति डॉलर हो जाए, तो एक डॉलर खरीदने के लिए अधिक रुपये देने पड़ते हैं।
रुपए की गिरावट रोकने वाले उपायों का सामान्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा की आपूर्ति बढ़ाना अथवा उसकी माँग कम करना होता है।
विकल्प (a) रुपए की गिरावट रोकने में सहायक हो सकता है।
गैर-आवश्यक आयातों को कम करने से आयातकों की डॉलर की माँग घट सकती है। निर्यात बढ़ने पर विदेशी खरीदारों से डॉलर अथवा अन्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इससे विदेशी मुद्रा की निवल उपलब्धता बढ़ सकती है और रुपए पर मूल्यह्रास का दबाव कम हो सकता है।
हालाँकि आवश्यक ऊर्जा, मशीनरी और मध्यवर्ती वस्तुओं के आयात को तुरंत कम करना कठिन हो सकता है। इसलिए यह उपाय मुख्यतः गैर-आवश्यक आयातों पर केंद्रित होता है।
विकल्प (b) रुपए की गिरावट रोकने में सहायक हो सकता है।
Masala Bonds विदेश में जारी किए जाने वाले, लेकिन भारतीय रुपए में मूल्यवर्गित बॉण्ड होते हैं। विदेशी निवेशक इन बॉण्डों में निवेश करने के लिए विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराते हैं, जबकि बॉण्ड की देयता रुपए में निर्धारित रहती है।
इन बॉण्डों से विदेशी पूँजी भारत में आ सकती है और विदेशी मुद्रा की आपूर्ति बढ़ सकती है। रुपए में मूल्यवर्गित होने के कारण विनिमय दर जोखिम मुख्यतः विदेशी निवेशक वहन करता है, न कि भारतीय जारीकर्ता।
विकल्प (c) रुपए की गिरावट रोकने में सहायक हो सकता है।
External Commercial Borrowing—ECB के अंतर्गत पात्र भारतीय संस्थाएँ विदेशी स्रोतों से वाणिज्यिक ऋण प्राप्त करती हैं। ECB संबंधी शर्तें आसान करने से भारतीय उधारकर्ता विदेश से अधिक धन जुटा सकते हैं।
विदेशी ऋण की राशि भारत आने पर विदेशी मुद्रा की आपूर्ति बढ़ सकती है और रुपए को अल्पकालीन समर्थन मिल सकता है। लेकिन अधिक ECB से बाह्य ऋण, पुनर्वित्त और विनिमय दर संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं; इसलिए इसका नियमन परिपक्वता अवधि, लागत और अनुमत उपयोग जैसी शर्तों के माध्यम से किया जाता है।
विकल्प (d) रुपए की गिरावट रोकने का संभावित उपाय नहीं है।
विस्तारवादी मौद्रिक नीति में सामान्यतः ब्याज दरें घटाई जाती हैं और घरेलू चलनिधि बढ़ाई जाती है। भारतीय ब्याज दरें घटने पर रुपए में मूल्यवर्गित वित्तीय आस्तियों का तुलनात्मक प्रतिफल कम हो सकता है। इससे विदेशी पूँजी का आगमन घटने अथवा पूँजी बाहर जाने की संभावना बढ़ सकती है।
अधिक चलनिधि से घरेलू माँग, आयात और मुद्रास्फीति भी बढ़ सकते हैं। ये परिस्थितियाँ रुपए पर अतिरिक्त गिरावट का दबाव डाल सकती हैं। इसलिए रुपए की गिरावट रोकने के लिए विस्तारवादी मौद्रिक नीति सर्वाधिक संभावित उपाय नहीं है।