Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
‘भुगतान प्रणाली डेटा के भंडारण’ से संबंधित भारतीय रिज़र्व बैंक के हाल के निदेश, जिन्हें लोकप्रिय रूप से डेटा डिक्टेट कहा जाता है, भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को आदेश देते हैं कि
वे यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके द्वारा संचालित भुगतान प्रणालियों से संबंधित संपूर्ण डेटा केवल भारत में स्थित किसी प्रणाली में ही संगृहीत किया जाए।
वे यह सुनिश्चित करेंगे कि इन प्रणालियों का स्वामित्व और संचालन सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा किया जाए।
वे कैलेंडर वर्ष के अंत तक समेकित प्रणाली लेखापरीक्षा रिपोर्ट भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को प्रस्तुत करेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Solution
RBI ने 6 अप्रैल 2018 को Storage of Payment System Data संबंधी निर्देश जारी किया था। यह निर्देश भारत में भुगतान प्रणाली संचालित करने वाले सभी अधिकृत Payment System Operators पर लागू किया गया।
कथन 1 सही है।
RBI ने भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को निर्देश दिया कि उनके द्वारा संचालित भुगतान प्रणालियों से संबंधित संपूर्ण डेटा भारत में स्थित प्रणाली में ही संगृहीत किया जाए।
इसमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं:
संपूर्ण End-to-End Transaction Details;
एकत्रित, प्रेषित और संसाधित सूचना;
भुगतान अथवा संदेश संबंधी निर्देश;
लेन-देन से संबंधित ग्राहक और भुगतान सूचना।
यदि किसी लेन-देन का विदेशी भाग भी हो, तो उस विदेशी भाग से संबंधित डेटा की प्रति विदेश में रखी जा सकती थी। RBI के बाद के स्पष्टीकरण के अनुसार भुगतान-डेटा को विदेश में संसाधित किया जा सकता है, लेकिन संसाधन पूरा होने के बाद उसे निर्धारित समय में भारत वापस लाकर विदेश में संगृहीत प्रति हटानी होती है।
कथन 2 सही नहीं है।
RBI के निर्देश में यह शर्त नहीं थी कि भुगतान प्रणाली का स्वामित्व अथवा संचालन केवल Public Sector Enterprises द्वारा किया जाए।
यह निर्देश सरकारी और निजी—दोनों प्रकार के अधिकृत Payment System Operators पर लागू था। इसका उद्देश्य प्रणाली का सरकारी स्वामित्व सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि भुगतान-डेटा का भारत में सुरक्षित भंडारण और RBI को प्रभावी पर्यवेक्षी पहुँच प्रदान करना था।
कथन 3 सही नहीं है।
भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को अनुपालन की पुष्टि के लिए System Audit Report प्रस्तुत करनी थी। यह लेखापरीक्षा CERT-In के पैनल में शामिल लेखापरीक्षकों द्वारा की जानी थी।
रिपोर्ट RBI को प्रस्तुत की जानी थी, न कि भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक—CAG—को। CAG मुख्यतः केंद्र और राज्य सरकारों तथा संबंधित सार्वजनिक संस्थाओं के खातों की लेखापरीक्षा करता है; वह इस निर्देश के अंतर्गत Payment System Operators का निर्दिष्ट प्राप्तकर्ता नहीं था।