JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2020

Previous Year Question

भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. ‘वाणिज्यिक पत्र’ अल्पकालीन प्रतिभूति-रहित वचन-पत्र है।

  2. ‘जमा प्रमाण-पत्र’ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किसी निगम को जारी किया जाने वाला दीर्घकालीन प्रपत्र है।

  3. ‘माँग मुद्रा’ अंतर-बैंक लेन-देन के लिए प्रयुक्त अल्पकालीन वित्त है।

  4. ‘शून्य-कूपन बॉण्ड’ अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा निगमों को जारी किए जाने वाले ब्याज-युक्त अल्पकालीन बॉण्ड हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1 और 2

B.

केवल 4

C.

केवल 1 और 3

D.

केवल 2, 3 और 4

Correct Answer: C

Detailed Solution

कथन 1 सही है।

Commercial Paper—CP एक अल्पकालीन, प्रतिभूति-रहित Money Market Instrument है, जिसे Promissory Note के रूप में जारी किया जाता है। इसे पात्र कंपनियाँ, Non-Banking Financial Companies तथा RBI के नियामकीय ढाँचे के अंतर्गत पात्र अन्य संस्थाएँ अल्पकालीन धन जुटाने के लिए जारी कर सकती हैं।

CP के पीछे किसी विशिष्ट परिसंपत्ति की जमानत नहीं होती। इसलिए निवेशक जारीकर्ता की Creditworthiness और Credit Rating पर निर्भर करता है। इसे सामान्यतः अंकित मूल्य से कम कीमत पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य का भुगतान होता है।

कथन 2 सही नहीं है।

Certificate of Deposit—CD एक परक्राम्य, प्रतिभूति-रहित Money Market Instrument है। इसे RBI स्वयं किसी निगम को जारी नहीं करता। इसे पात्र अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और RBI द्वारा अनुमत कुछ वित्तीय संस्थाएँ जारी कर सकती हैं।

CD का उपयोग बैंकों द्वारा अपेक्षाकृत अल्प अवधि के लिए थोक जमाराशियाँ जुटाने में किया जाता है। इसलिए इसे RBI द्वारा निगम को जारी किया जाने वाला दीर्घकालीन साधन बताना दो आधारों पर गलत है—जारीकर्ता और अवधि दोनों गलत हैं।

कथन 3 सही है।

Call Money बाजार में बैंकों और पात्र वित्तीय संस्थाओं के बीच अत्यंत अल्प अवधि के लिए प्रतिभूति-रहित धन उधार लिया और दिया जाता है।

RBI की परिभाषा के अनुसार:

  • एक दिन अर्थात Overnight अवधि का लेन-देन Call Money है;

  • दो से चौदह दिनों की अवधि का लेन-देन Notice Money है;

  • चौदह दिनों से अधिक और एक वर्ष तक का लेन-देन Term Money है।

इस बाजार का उपयोग बैंक दैनिक नकदी आवश्यकताओं, भुगतान-दायित्वों और अल्पकालीन Liquidity Mismatch को पूरा करने के लिए करते हैं। अतः कथन 3 सही है।

कथन 4 सही नहीं है।

Zero-Coupon Bond पर आवधिक ब्याज या Coupon का भुगतान नहीं किया जाता। इसे सामान्यतः अंकित मूल्य से कम कीमत पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य चुकाया जाता है। निवेशक का प्रतिफल निर्गम मूल्य और परिपक्वता मूल्य के अंतर से प्राप्त होता है।

यह आवश्यक नहीं कि Zero-Coupon Bonds केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक निगमों को जारी करें। इन्हें सरकार अथवा अन्य पात्र संस्थाएँ भी जारी कर सकती हैं। इन्हें “ब्याज-युक्त अल्पकालीन बॉण्ड” कहना भी गलत है।

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