Previous Year Question
भारतीय सरकारी बॉण्ड प्रतिफल निम्नलिखित में से किससे प्रभावित होते हैं?
संयुक्त राज्य फेडरल रिज़र्व की कार्रवाइयाँ
भारतीय रिज़र्व बैंक की कार्रवाइयाँ
मुद्रास्फीति और अल्पकालिक ब्याज दरें
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
Bond Yield वह प्रतिफल है जिसे निवेशक बॉण्ड को उसकी वर्तमान बाजार कीमत पर खरीदकर प्राप्त करने की अपेक्षा करता है। बॉण्ड की कीमत और उसके प्रतिफल के बीच विपरीत संबंध होता है—बॉण्ड की कीमत बढ़ने पर Yield घटता है और कीमत घटने पर Yield बढ़ता है।
कथन 1 सही है।
अमेरिकी Federal Reserve की मौद्रिक कार्रवाइयाँ वैश्विक ब्याज दरों, पूँजी प्रवाह, डॉलर के मूल्य और निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति को प्रभावित करती हैं।
यदि Federal Reserve ब्याज दर बढ़ाता है, तो अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाला प्रतिफल अधिक आकर्षक हो सकता है। इससे विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से धन निकालकर अमेरिकी परिसंपत्तियों में लगा सकते हैं। भारतीय सरकारी बॉण्डों की माँग घटने पर उनकी कीमत कम और Yield अधिक हो सकता है।
इसके विपरीत, अमेरिकी ब्याज दरें घटने पर भारत जैसे बाजारों की अपेक्षाकृत अधिक प्रतिफल देने वाली प्रतिभूतियों की माँग बढ़ सकती है। इससे भारतीय बॉण्डों की कीमत बढ़ने और Yield घटने की संभावना होती है।
कथन 2 सही है।
RBI की नीतिगत ब्याज दरें, तरलता प्रबंधन और Open Market Operations सरकारी बॉण्ड प्रतिफलों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
Repo Rate में वृद्धि होने पर अर्थव्यवस्था में अल्पकालिक ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। निवेशक मौजूदा बॉण्डों पर भी अधिक प्रतिफल की माँग कर सकते हैं, जिससे उनकी बाजार कीमत घटती और Yield बढ़ता है।
RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदने पर उनकी माँग और कीमत बढ़ सकती है तथा Yield घट सकता है। RBI द्वारा प्रतिभूतियाँ बेचने पर उनकी बाजार-आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे कीमत घटने और Yield बढ़ने का दबाव बनता है।
कथन 3 सही है।
मुद्रास्फीति बढ़ने पर बॉण्ड से मिलने वाले निश्चित भुगतान की वास्तविक क्रय-शक्ति घटती है। निवेशक इस हानि की भरपाई के लिए अधिक Nominal Yield की माँग करते हैं। इसलिए बढ़ती मुद्रास्फीति या मुद्रास्फीति की बढ़ती प्रत्याशा सामान्यतः बॉण्ड प्रतिफलों पर ऊपर की ओर दबाव डालती है।
अल्पकालिक ब्याज दरें भी दीर्घकालीन बॉण्ड प्रतिफलों के निर्धारण का आधार बनती हैं। दीर्घकालीन Yield में अपेक्षित भावी अल्पकालिक ब्याज दरें, अपेक्षित मुद्रास्फीति और अवधि-संबंधी जोखिम प्रीमियम सम्मिलित होते हैं।
सरकारी उधारी की मात्रा, राजकोषीय घाटा, सरकारी प्रतिभूतियों की माँग और बाजार की जोखिम-धारणा भी प्रतिफलों को प्रभावित कर सकती हैं।