JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2021

Previous Year Question

किसी मुद्रा के अवमूल्यन का प्रभाव यह है कि वह अनिवार्य रूप से

  1. विदेशी बाजारों में घरेलू निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करता है।

  2. घरेलू मुद्रा के विदेशी मूल्य को बढ़ाता है।

  3. व्यापार संतुलन में सुधार करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 1 और 2

C.

केवल 3

D.

केवल 2 और 3

Correct Answer: A

Detailed Solution

मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation) सरकार अथवा मौद्रिक प्राधिकारी द्वारा स्थिर विनिमय-दर व्यवस्था में घरेलू मुद्रा का आधिकारिक बाहरी मूल्य घटाना है। यह बाजार की शक्तियों से होने वाले मूल्यह्रास (Depreciation) से अलग है।

कथन 1 सही है।

अवमूल्यन के बाद विदेशी मुद्रा की एक इकाई खरीदने के लिए अधिक घरेलू मुद्रा देनी पड़ती है। यदि घरेलू कीमतें तत्काल समान रहती हैं, तो विदेशी खरीदारों के लिए देश की निर्यातित वस्तुएँ उनकी मुद्रा में सस्ती हो जाती हैं।

उदाहरण के लिए, यदि किसी भारतीय वस्तु की कीमत ₹1,000 है:

  • ₹50 प्रति डॉलर की दर पर उसकी कीमत 20 डॉलर होगी।

  • ₹100 प्रति डॉलर की दर पर वही वस्तु 10 डॉलर की होगी।

इस प्रकार अवमूल्यन घरेलू निर्यात को विदेशी बाजारों में मूल्य की दृष्टि से अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है। हालाँकि वास्तविक निर्यात-वृद्धि उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, विदेशी माँग और घरेलू मुद्रास्फीति पर भी निर्भर करेगी।

कथन 2 सही नहीं है।

अवमूल्यन का अर्थ ही घरेलू मुद्रा के विदेशी मूल्य में आधिकारिक कमी है। इसलिए यह घरेलू मुद्रा का विदेशी मूल्य बढ़ाता नहीं, बल्कि घटाता है।

उदाहरणतः विनिमय दर ₹50 से बढ़कर ₹100 प्रति डॉलर होने का अर्थ है कि रुपये का डॉलर के संदर्भ में मूल्य कम हुआ है।

कथन 3 सही नहीं है।

अवमूल्यन से व्यापार संतुलन में सुधार अनिवार्य रूप से नहीं होता। निर्यात की मात्रा कितनी बढ़ेगी और आयात की मात्रा कितनी घटेगी, यह दोनों की माँग की मूल्य-लोच पर निर्भर करता है।

अवमूल्यन के तुरंत बाद आयात महँगा हो जाता है, लेकिन आवश्यक पेट्रोलियम, मशीनरी अथवा अन्य वस्तुओं का आयात शीघ्र कम नहीं हो सकता। परिणामस्वरूप शुरुआती अवधि में व्यापार घाटा बढ़ भी सकता है। इसे J-curve effect कहा जाता है।

व्यापार संतुलन में सुधार की संभावना तब अधिक होती है जब निर्यात और आयात की माँग की मूल्य-लोच का योग एक से अधिक हो। इसे Marshall-Lerner Condition कहते हैं। इसलिए सुधार संभव है, लेकिन अनिवार्य नहीं।

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