Previous Year Question
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
यदि मुद्रास्फीति अत्यधिक है, तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदने की संभावना है।
यदि रुपए का तेजी से मूल्यह्रास हो रहा है, तो RBI द्वारा बाज़ार में डॉलर बेचने की संभावना है।
यदि संयुक्त राज्य अमेरिका अथवा यूरोपीय संघ में ब्याज दरें गिरती हैं, तो इससे RBI द्वारा डॉलर खरीदने की संभावना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
1 और 2
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही नहीं है।
RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदने पर उनके बदले बैंकिंग प्रणाली में रुपये जारी किए जाते हैं। इससे बैंकों की तरलता और अर्थव्यवस्था में मुद्रा-आपूर्ति बढ़ सकती है। यह सामान्यतः विस्तारकारी मौद्रिक कार्रवाई है।
अत्यधिक मुद्रास्फीति की स्थिति में RBI का सामान्य उद्देश्य अतिरिक्त तरलता और समग्र माँग को नियंत्रित करना होता है। ऐसी स्थिति में RBI सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदने के बजाय Open Market Operations के अंतर्गत उन्हें बेच सकता है। प्रतिभूतियाँ खरीदने वाले बैंक तथा अन्य संस्थान RBI को रुपये देते हैं, जिससे प्रणाली की अतिरिक्त तरलता घटती है।
इसलिए अत्यधिक मुद्रास्फीति की स्थिति में RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदने की संभावना वाला कथन सही नहीं है।
कथन 2 सही है।
रुपए के तेजी से मूल्यह्रास का अर्थ है कि एक डॉलर खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक रुपये देने पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में RBI विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेच सकता है।
डॉलर बेचने से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ती है। साथ ही, डॉलर खरीदने वाले बाजार प्रतिभागियों से रुपये RBI के पास चले जाते हैं। इससे रुपये पर पड़ रहा अत्यधिक मूल्यह्रास का दबाव कम किया जा सकता है।
RBI का उद्देश्य किसी निश्चित विनिमय दर को बनाए रखना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक अस्थिरता और अव्यवस्थित गतिविधियों को नियंत्रित करना होता है।
कथन 3 सही है।
यदि अमेरिका अथवा यूरोपीय संघ में ब्याज दरें घटती हैं, तो वहाँ की वित्तीय परिसंपत्तियों पर मिलने वाला प्रतिफल कम हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय निवेशक अपेक्षाकृत अधिक प्रतिफल वाले भारतीय बाजार की ओर पूँजी स्थानांतरित कर सकते हैं।
भारत में विदेशी पूँजी आने पर निवेशक डॉलर बेचकर रुपये खरीदते हैं। इससे रुपये की माँग बढ़ती है और उस पर मूल्यवृद्धि का दबाव बन सकता है। अत्यधिक मूल्यवृद्धि को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए RBI बाजार से डॉलर खरीद सकता है।
डॉलर खरीदने पर RBI रुपये जारी करता है और घरेलू तरलता बढ़ती है। यदि यह वृद्धि आवश्यक स्तर से अधिक हो, तो RBI Open Market Operations अथवा अन्य साधनों से उसका Sterilisation कर सकता है।