JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2022

Previous Year Question

भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. घरेलू वित्तीय बचत का एक भाग सरकारी उधारी के लिए जाता है।

  2. नीलामियों में बाज़ार-संबंधित दरों पर जारी दिनांकित प्रतिभूतियाँ, आंतरिक ऋण का एक बड़ा घटक होती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: C

Detailed Solution

कथन 1 सही है।

घरेलू क्षेत्र अपनी आय का जो भाग वर्तमान उपभोग पर खर्च नहीं करता, वह बचत कहलाता है। इस बचत का एक हिस्सा भौतिक परिसंपत्तियों में और दूसरा हिस्सा वित्तीय परिसंपत्तियों में रखा जाता है।

घरेलू वित्तीय बचत में मुख्यतः मुद्रा, बैंक जमाराशियाँ, जीवन बीमा निधियाँ, भविष्य एवं पेंशन निधियाँ, लघु बचत योजनाएँ, म्यूचुअल फंड और प्रतिभूतियाँ सम्मिलित होती हैं।

इस वित्तीय बचत का एक भाग सरकार तक दो तरीकों से पहुँचता है:

  • परिवार राष्ट्रीय लघु बचत योजनाओं अथवा सरकारी प्रतिभूतियों में प्रत्यक्ष निवेश कर सकते हैं।

  • बैंक, बीमा कंपनियाँ तथा पेंशन निधियाँ परिवारों से प्राप्त धन का एक भाग सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करती हैं। यह सरकारी उधारी का अप्रत्यक्ष वित्तपोषण है।

इस प्रकार घरेलू वित्तीय बचत सरकार के राजकोषीय घाटे और अन्य वित्तीय आवश्यकताओं के वित्तपोषण का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है।

कथन 2 सही है।

दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियाँ ऐसी दीर्घकालीन ऋण प्रतिभूतियाँ हैं जिनकी परिपक्वता अवधि सामान्यतः एक वर्ष से अधिक होती है। इनमें निश्चित अथवा अस्थिर कूपन दर हो सकती है तथा मूलधन का भुगतान निर्धारित परिपक्वता तिथि पर किया जाता है।

केंद्र सरकार की दिनांकित प्रतिभूतियाँ RBI द्वारा आयोजित नीलामियों के माध्यम से जारी की जाती हैं। नीलामी में प्राप्त बोलियों के आधार पर प्रतिभूति की कीमत अथवा प्रतिफल निर्धारित होता है; इसलिए इन्हें बाज़ार-संबंधित दरों पर जारी प्रतिभूतियाँ कहा जाता है।

केंद्र सरकार के आंतरिक ऋण में मुख्यतः दिनांकित प्रतिभूतियाँ, राजकोषीय बिल तथा कुछ विशेष प्रतिभूतियाँ सम्मिलित होती हैं। इनमें दिनांकित प्रतिभूतियों का हिस्सा बहुत बड़ा है। अतः दूसरा कथन भी सही है।

ध्यान रहे कि दिनांकित प्रतिभूतियाँ और Treasury Bills अलग हैं। दिनांकित प्रतिभूतियों की परिपक्वता एक वर्ष से अधिक होती है, जबकि Treasury Bills अल्पकालीन साधन हैं और वर्तमान में 91, 182 तथा 364 दिनों की अवधियों के लिए जारी किए जाते हैं।

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