Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. पूंजीगत प्राप्तियाँ सरकार के लिए देयता का सृजन करती हैं अथवा उसकी परिसंपत्तियों में कमी करती हैं।
II. उधारियाँ और विनिवेश पूंजीगत प्राप्तियाँ हैं।
III. ऋणों पर प्राप्त ब्याज सरकार के लिए देयता का सृजन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
केवल I और II
केवल II और III
केवल I और III
I, II और III
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन I सही है। पूंजीगत प्राप्तियाँ वे प्राप्तियाँ हैं जो सरकार की देयताओं में वृद्धि करती हैं अथवा उसकी परिसंपत्तियों में कमी करती हैं।
पूंजीगत प्राप्तियों को दो भागों में बाँटा जाता है:
Debt-creating Capital Receipts: ये सरकार के लिए नई देयता उत्पन्न करती हैं। बाजार से उधारियाँ, Treasury Bills और अन्य ऋण इसके उदाहरण हैं।
Non-debt Capital Receipts: ये नई देयता उत्पन्न नहीं करतीं, लेकिन सरकार की परिसंपत्तियों में कमी करती हैं। ऋणों की वसूली और विनिवेश इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
कथन II सही है। सरकारी उधारियाँ Capital Receipts हैं क्योंकि इनके कारण सरकार पर भविष्य में मूलधन लौटाने की देयता उत्पन्न होती है।
विनिवेश भी Capital Receipt है। इसमें सरकार किसी Public Sector Enterprise में अपनी Equity का एक भाग बेचती है। इससे नई ऋण-देयता उत्पन्न नहीं होती, लेकिन सरकार की वित्तीय परिसंपत्ति अथवा स्वामित्व-हिस्सेदारी कम हो जाती है। इसलिए यह Non-debt Capital Receipt है।
कथन III सही नहीं है। सरकार द्वारा दिए गए ऋणों पर प्राप्त ब्याज Revenue Receipt होता है। इससे सरकार पर कोई देयता उत्पन्न नहीं होती। इसके विपरीत, यह सरकार की आय है।
यहाँ ऋणों पर प्राप्त ब्याज और ऋणों की वसूली के बीच अंतर आवश्यक है। ब्याज-प्राप्ति Revenue Receipt है, जबकि मूलधन की वसूली Capital Receipt है क्योंकि उससे सरकार की बकाया ऋण-परिसंपत्ति कम होती है।